गोड्डा

प्रशिक्षु डॉक्टर किसलय उपाध्याय ने रक्तदान कर बचाई जरूरतमंद की जान

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
पथरगामा। आज के दौर में जहां लोग अक्सर अपनी व्यस्तताओं में उलझे रहते हैं, वहीं परसपानी स्थित होम्योपैथी कॉलेज के प्रशिक्षु डॉक्टर किसलय उपाध्याय ने मानवता, संवेदनशीलता और सेवा भावना का ऐसा उदाहरण पेश किया है, जो समाज के लिए प्रेरणादायी बन गया है। उनके एक निर्णय ने एक जरूरतमंद व्यक्ति को नया जीवन दे दिया। जानकारी के अनुसार, गोड्डा के एक मरीज को अचानक रक्त की अत्यंत आवश्यकता पड़ गई थी। परिजन चिंतित थे और समय तेजी से बीत रहा था। ऐसे कठिन समय में जब रक्त की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बन जाती है, उसी वक्त यह सूचना किसलय उपाध्याय तक पहुंची। बिना एक पल गंवाए वे तुरंत गोड्डा सदर अस्पताल पहुंचे और स्वेच्छा से रक्तदान किया। समय पर उठाया कदम, मिला जीवनदान डॉक्टर किसलय के इस त्वरित और निस्वार्थ कदम से मरीज को समय पर रक्त उपलब्ध हो सका। चिकित्सकों के अनुसार, समय पर रक्त मिलना कई बार जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर साबित होता है। ऐसे में उनका यह प्रयास उस मरीज और उसके परिवार के लिए किसी वरदान से कम नहीं रहा। चिकित्सा पेशे की असली पहचान चिकित्सा क्षेत्र को सेवा का सबसे बड़ा माध्यम माना जाता है। प्रशिक्षु डॉक्टर होने के बावजूद किसलय उपाध्याय ने यह साबित कर दिया कि सेवा भावना केवल डिग्री या पद से नहीं, बल्कि दिल से आती है। उन्होंने यह संदेश दिया कि एक सच्चा चिकित्सक केवल दवाइयों से ही नहीं, बल्कि अपने मानवीय व्यवहार और संवेदनशीलता से भी लोगों का उपचार करता है। युवाओं के लिए प्रेरक उदाहरण उनकी इस पहल की चर्चा पूरे इलाके में हो रही है। स्थानीय लोगों और कॉलेज के साथियों ने उनके इस कार्य की भूरि-भूरि प्रशंसा की है। कई लोगों ने कहा कि आज के युवाओं को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए और रक्तदान जैसे पुनीत कार्य में आगे आना चाहिए।रक्तदान को लेकर समाज में कई भ्रांतियां अब भी मौजूद हैं, लेकिन किसलय उपाध्याय ने अपने कार्य से यह साबित कर दिया कि स्वेच्छा से किया गया रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित है और यह किसी की जान बचाने का सबसे बड़ा माध्यम बन सकता है। समाज को मिला सकारात्मक संदेश इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जब युवा जागरूक और संवेदनशील होते हैं, तो समाज में सकारात्मक बदलाव स्वतः आता है। डॉक्टर किसलय उपाध्याय का यह कदम केवल एक रक्तदान नहीं, बल्कि मानवता के प्रति समर्पण का प्रतीक है।
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