अंतरराष्ट्रीय

अमेरिका पर आग-बबूला हुआ कनाडा

एनपीटी ब्यूरो

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अमेरिका कनाडा पर अनुचित टैरिफ लगाता है, तो कनाडा की ओर से तत्काल और कठोर जवाब दिया जाएगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ता जा रहा है।

अमेरिकी टैरिफ और ट्रंप की घोषणा

राष्ट्रपति ट्रंप ने कनाडा और मैक्सिको से अमेरिका में आने वाली अवैध दवाओं को लेकर कड़ी आलोचना की है। उन्होंने घोषणा की है कि 4 मार्च से इन दोनों देशों पर नए टैरिफ लागू किए जाएंगे। ट्रंप का कहना है कि यदि अवैध दवाओं का प्रवाह नहीं रोका गया, तो अमेरिका यह कड़े फैसले लेने के लिए मजबूर होगा।

कनाडा की कड़ी प्रतिक्रिया

प्रधानमंत्री ट्रूडो ने साफ कर दिया है कि अगर कनाडा पर यह टैरिफ लगाया गया तो उनकी सरकार तत्काल और प्रभावी जवाब देगी। उन्होंने कहा, “अगर मंगलवार को अमेरिका अनुचित टैरिफ लागू करता है, तो हम पूरी मजबूती के साथ जवाब देंगे, जैसा कि हर कनाडाई नागरिक की अपेक्षा है।”

सीमा सुरक्षा को लेकर ट्रूडो का बयान

ट्रूडो ने यह भी स्पष्ट किया कि कनाडा से अमेरिका में जाने वाली अवैध दवाओं का प्रवाह बहुत कम है और उनकी सरकार पहले ही सीमा सुरक्षा को मजबूत कर चुकी है। उन्होंने बताया कि कनाडा ने इस उद्देश्य के लिए 1.3 बिलियन डॉलर का निवेश किया है, जिसमें ड्रोन, ब्लैकहॉक हेलीकॉप्टर और 10,000 से अधिक सीमा सुरक्षा गार्ड तैनात किए गए हैं।

अस्थायी रोक के बाद अब पक्के टैरिफ लागू

ट्रंप प्रशासन ने पहले 30 दिनों के लिए इन टैरिफ को रोक दिया था, ताकि मेक्सिको और कनाडा के साथ सीमा सुरक्षा पर नए समझौते किए जा सकें। हालांकि, अब यह टैरिफ 4 मार्च से पूरी तरह लागू होने जा रहे हैं, जिससे दोनों देशों के व्यापार पर सीधा असर पड़ेगा।

फेंटेनाइल संकट और चीन पर नए टैरिफ

अमेरिका ने टैरिफ लगाने के फैसले को फेंटेनाइल संकट से जोड़ा है। ट्रंप ने कहा है कि चीन निर्मित अवैध दवाओं के कारण अमेरिका में 100,000 से अधिक लोगों की मौत हुई है। इसी कारण 4 मार्च से चीन पर भी 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की योजना बनाई गई है।

अमेरिका-कनाडा व्यापारिक रिश्तों पर असर

कनाडा और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव लगातार बढ़ रहा है, खासकर अवैध दवाओं की तस्करी और फेंटेनाइल संकट को लेकर। ट्रूडो के सख्त रुख के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि अमेरिका-कनाडा संबंधों पर इसका क्या असर पड़ता है और क्या यह विवाद वार्ता के जरिए सुलझाया जा सकता है।

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