
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
अमेठी। कानून का पालन कराने वाली पुलिस ही जब नियम तोड़ने लगे, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजमी है। अमेठी के गौरीगंज कोतवाली क्षेत्र के बाबूगंज बीओबी बैंक के पास आज महिला थाने की सरकारी बोलेरो ने ऐसा कहर बरपाया कि एक परिवार की दुनिया उजड़ गई।
तेज रफ्तार बोलेरो ने सामने से जा रही बाइक को इतनी जोरदार टक्कर मारी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए। हादसे में एक युवक की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। जबकि दो घायल युवकों को गंभीर हालत में जिला अस्पताल रेफ़र किया गया है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बोलेरो की स्पीड इतनी तेज थी कि बाइक सवारों को संभलने तक का मौका नहीं मिला।
लेकिन इस हादसे के बाद जो खुलासा हुआ, उसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। जिस सरकारी बोलेरो से यह जानलेवा दुर्घटना हुई, वही वाहन बिना पॉल्यूशन और बिना इंश्योरेंस के सड़क पर फर्राटा भर रहा था यानि जिस विभाग पर कानून लागू करने की जिम्मेदारी है, वही खुद नियमों की धज्जियां उड़ाता मिला।
अब आप इस वाहन का डिटेल भी जान लीजिए। आज की तारीख में ये वाहन 7 साल 9 महीने 19 दिन का हो चुका है। इसका बीमा कब एक्सपायर हुआ इसका तो पता नहीं लेकिन मौजूदा समय में इस वाहन का बीमा नहीं है और प्रदूषण की अवधि भी 22 जनवरी 2025 को समाप्त हो चुकी है फिर भी चूंकि गाड़ी सरकारी है। इसलिए किसी की क्या मजाल कि इसके बारे में कोई टीका टिप्पणी कर सके। बड़ी बात तो ये है कि विभाग की गाड़ियों के रख रखाव और कागजों को दुरुस्त रखने वाले जिम्मेदार ही गैर जिम्मेदारी करने लगें तो दूसरों को क्या कहा जाए। ट्रैफिक पुलिस हो या सिविल पुलिस, दूसरे की गाड़ियों को बिना बीमा और बिना वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र के पाती है तो भारी भरकम चालान करती है लेकिन इस गाड़ी के विरुद्ध किस धारा में चालान होगा भी या नहीं, ये आगे समय बताएगा।
हादसे के बाद मौके पर जुटी भीड़ में भारी गुस्सा है। लोगों का कहना है कि अगर यही गलती किसी आम नागरिक से होती, तो पल भर में चालान, एफआईआर और गिरफ्तारी — तीनों हो जातीं। पर जब मामला पुलिस का होता है, तो फाइलें अक्सर धूल फांकती रह जाती हैं।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या विभाग अपने ही स्टाफ पर कार्रवाई करने की हिम्मत दिखाएगा या यह मामला भी सरकारी दफ्तरों की चुप्पी में दबकर रह जाएगा।

