
एनपीटी गोड्डा ब्यूरो
बसंतराय। प्रखंड के महेशपुर गांव स्थित चर्चित काली मंदिर आयोजित पांच दिवसीय वार्षिक पूजनोत्सव कार्यक्रम बुधवार की सुबह महाप्रसाद वितरण के साथ संपन्न हो गया। मंगलवार को अहले सुबह से की मंदिर परिसर एवं गांव के ही सैलेश धाम में विविध आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किये गये। अर्द्ध रात्री के बाद तांत्रिक पद्धति से हवन किया गया एवं माता को भोग लगया गया। इसके उपरांत उपस्थित श्रद्धालुओं ने बहले सुबह महाप्रसाद ग्रहण किया। जबकि 10 बजे तक समस्त ग्रामीण सदस्यों के बीच महाप्रसाद वितरित कर दिया गया। इसके पूर्व शैलेश धाम एवं काली मंदिर परिसर में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों के दौरान घंटे की आवज व जयकारा से आसपास का वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया। मंगलवार की दोपहर से लेकर रातभर जिला मुख्यालय सहित आसपास गांवों से आने वाले श्रद्धालुओं के आने-जाने का सिलसिला जारी रहा। देर रात तक पूजन व दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। काली मंदिर पूजा समिति के अध्यक्ष अजय चौधरी
कोषाध्यक्ष रत्नदीप राही, सुधाकर चौधरी, दिनकर झा,उमेश चंद्र झा, नीलेश कुमार झा, जुगनु सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि यह काली मंदिर झारखंड -बिहार व बंगाल के श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र है। माता के दरबार में जो भी श्रद्धालु माथा टेकता है उसकी मुरादें अवश्य पूरी होती हैं। पिछले वर्ष ही मंदिर का जीर्णद्धार के उपरांत माता की पुर्नस्थापना की गई है। नवनिर्मित मां काली भवन सहज ही श्रद्धालुओं का मनमोह लेता है। यहां कुछ पल बैठने से ही मन में शांति का अनुभव होता है और मां का सान्निध्य प्राप्त होता है। यहां दो पंडितों द्वारा सालो भर विधिवत दुर्गा सप्तशती का पाठ हाेता है। इससे इस पीठ की महत्ता का आभास होता है। अनुष्ठान के दौरान भी इसके पूर्व सोमवार को पांच पंडितों की टोली द्वारा दुर्गा सप्तशती पाठ व मंगलवार 11 पंडितों द्वारा दुर्गा सप्तशति पाठ किया गया। । मां के जयकारों से सारा मंदिर परिसर गुंजायमान हो रहा था। संपूर्ण वैदिक कार्यक्रम पंडित अर्जुन झा की अगुवाई में किया जा रहा है। महाआरति व महाप्रसाद में शामिल होना श्रद्धालु अपना सौभाग्य समझते हैं। मां का प्रसाद समझकर उसे श्रद्धापूर्वक ग्रहण करने की प्राचीन परंपरा है। पूजा के दौरान ग्रामीणों की उत्साह परवान पर रहती है। उन्होंने बताया कि दिनोंदिन पूजन व दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती जा रही है। कार्यक्रम को सफल बनाने में समस्त ग्रामीणों की भूमिका सराहनीय रही।