पाकुड़

नगर थाना पुलिस बने विक्षिप्त नाबालिक बालिका के फरिश्ता, बेटी की खुबसूरती देख पहचान ने में देर

एनपीटी पाकुड़ ब्यूरो,

पाकुड़ (झा०खं०), कौन कहता है कि पुलिस वालों का दिल नहीं होता? इन्सानियत की ऐसी समायोजन कि विक्षप्त बालिका भी अपने घर जाने को तैयार नहीं! प्यार की कथा नगर थाना पुलिस में मिसाल के तौर पर जगजाहिर रहा जो कर्तव्यनिष्ठा का भी परिचायक रहा। दरअसल बीते 29 मार्च 2025 को समय करीब 8:40 बजे (रात्रि ) कलिकापुर शनि मंदिर के पास एक विक्षिप्त नाबालिक बालिका भटकते हुए सुनसान जगह पर पायी गई, जिसे स्थानीय लोगों के द्वारा नगर थाना को सूचित किया गया। नगर थाना गश्ती दल पहुंचकर उन्हें सुरक्षार्थ थाना लाया गया। पूछताछ दौरान उन्होंने अपना नाम- प्रियंका कुमारी (उम्र- करीब 14 वर्ष, पिता- उचित तांती, ग्राम- किशनपुर, थाना- अमरपुर, जिला- बांका बिहार ) बतायी, जिन्हें महिला कांस्टेबल के निगरानी में सुरक्षार्थ थाना में रखा गया है। पुनः दूसरे दिन सीडब्ल्यूईसी CWC को सूचित किया गया, असंतोषजनक जवाब प्राप्त होने पर नगर थाना, पाकुड़ ने अपना फ़र्ज़ निभाने के लिए अपनी जिम्मेदारी की बागडोर संभाला। उसके सेवा के लिए एक महिला कांस्टेबल तैनात किया गया। समय पर खाना के लिए मेस में कहा गया। दिये गये पता का अमरपुर के थानेदार से बातचीत कर पता खोजवाने का प्रयत्न किया गया। तीसरे दिन उनसे पूछा गया, तो ये (प्रियंका) बतायी कि मेरा घर ग्राम- किशनपुर, थाना- अकबरनगर, जिला- भागलपुर (बिहार ) है। अकबरनगर थाना के थानेदार से बातचीत कर उनका पता को ढूंढा गया। उनको नहलाकर नया कपड़ा पहनाया गया। उनके माता- पिता से विडिओ-कॉलिंग से बात करवाया गया, जिसमें उनके माता-पिता बोले कि अपनी बेटी को हमलोग पहचान नहीं पाये, साफ- सुथरा नया कपड़ा में देखकर। भारत देश पर हमें गर्व है, जो ऐसे सिपाही सुरक्षा के लिए तैनात हैं। वही 01 अप्रेल 2025 को शाम में उनके पिताजी आये और वह रोकर बोलने लगी कि हम यहीं रहेंगे दीदी के पास और वह घर जाने के लिए तैयार नहीं हो रही थी। फिर उन्हें काफी समझाया गया, तब अपने पापा के पास जाने के लिए तैयार हुईं। जाते समय सभी का पांव छुईं, जैसे अपने घर से अपनी बहन विदा हो रही हो! कुछ देर पहले वह अपने पिताजी के साथ घर पहुंची। उसके पिताजी कॉल किये और पाकुड़, नगर थाना पुलिस को धन्यवाद ज्ञापित किया। प्रियंका भी बोली “Thank you bhaiya”.

रिश्ते भी अजीब होते हैं:

इस रिश्ते की अहमियत को जानें, ये भाई- बहन का प्यार है,
सम्मान के साथ वह विदा हुई, ये नगर थाना का उद्धार है।
वह घर नहीं जाने के लिए रोने लगी, पिता हुए आश्चर्य,
उसे थाना ही अपना आशियाना लगा, यह नया चमत्कार है।

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Nurul Islam

PRABHARI (MANDAL)

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