भूमाफियों के खिलाफ लड़ाई लड़ रही पुर्व ज़िला पंचायत सदस्या को जान का खतरा

पुलिस ने दर्ज की FIR
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो ।
मोदीनगर । उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद ज़िले की मोदीनगर निवासी पूर्व जिला पंचायत सदस्य दीपा त्यागी ने सरकारी जमीन को भूमाफियों से बचाने की जो मुहिम शुरू की थी, वह अब उनकी जान के लिए खतरा बनती जा रही है। लगातार मिल रही धमकियों और पीछा करने की घटनाओं के बाद आखिरकार दीपा त्यागी ने निवाड़ी थाने में तहरीर दी थी , जिस पर डीसीपी ग्रामीण के आदेश के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।
दीपा त्यागी का कहना है कि उन्होंने पिछले कई वर्षों से तहसील मोदीनगर के ग्राम भनेड़ा में राज्य सरकार की भूमि पर हुए अवैध क़ब्ज़े के खिलाफ आवाज़ उठा रखी हैं। इसको लेकर कई बार अधिकारियों को अवगत कराया कि ग्राम समाज की भूमि पर स्थानीय भूमाफियाओ ने अवैध रूप से कब्जा जमा रखा है।
उन्होंने मीडिया और प्रशासन के सामने इसके सबूत भी साझा किए और मुख्यमंत्री से लेकर स्थानीय प्रशासन को भी कई बार इसकी शिकायत भी की है इस पर कार्रवाई करते हुए एक बार तहसील प्रशासन ने ज़मीन को कब्जा मुक्त भी कराया था लेकिन जैसे ही स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी बदलते है भूमाफिया द्वारा फिर से अवैध कब्जा जमा लिया जताता है जिस कारण यह लड़ाई और लंबी होती जा रही है
अब दीपा त्यागी के इस साहसी कदम की कीमत उन्हें अब अपनी जान के डर के रूप में चुकानी पड़ रही है। दीपा त्यागी ने बताया कि पिछले कुछ हफ्तों से अज्ञात लोग उनका पीछा कर रहे हैं। कई बार उनके घर के बाहर संदिग्ध देखे गए। उन्हें धमकियाँ गई हैं।
उन्होंने इस संबंध में थाना निवाड़ी में एफआईआर दर्ज करवाई है। दीपा ने मांग की है कि भूमाफिया के विरुद्ध शीघ्र कार्रवाई की जाए क्योंकि उन्हें आशंका है कि भूमाफिया उनके खिलाफ कुछ भी कर सकते हैं।
नेशनल प्रेस टाइम्स से बातचीत में दीपा त्यागी कहती हैं कि “मैं ये लड़ाई अपने लिए नहीं, समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए लड़ रही हूँ। सरकारी ज़मीनें जनता की संपत्ति हैं उन्हें बचाना हर नागरिक का कर्तव्य है।”
हालांकि, दीपा की शिकायत के बाद भी प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी ने भूमाफियों के खिलाफ आवाज़ उठाई हो और उसे धमकियों का सामना करना पड़ा हो। मगर हर बार ऐसे मामलों में प्रशासन की कार्रवाई सीमित और देर से होती है सवाल यह भी उठता है कि क्या इस साहसी महिला को प्रशासन समय रहते सुरक्षा देगा या एक और सत्य की आवाज़ साजिशों की शिकार हो जाएगी?




