अमरोहा
इमाम हुसैन ने दुनिया को दिया इंसानियत का पैग़ाम- मौलाना मशरेक़ैन
कर्बला का ज़िक्र सुनकर रोने लगे अज़ादार

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
उझारी। इमाम हुसैन ने कर्बला के मैदान में इंसानियत व भाईचारे का पैगाम देते हुए अपनी जान कुर्बान कर दी, लेकिन किसी ज़ालिम की बैअत कुबूल नहीं की।
उझारी सादात स्थित इमामबारगाहे अबू तालिब में चल रहे अशरा ए मोहर्रम की पांचवी मजलिस का आगाज मंजूर उल हसन उर्फ बश्शन मियां ने मर्सिया ख्वानी से किया। पेशख्वानी जॉन बाकरी, मौ० वासिफ रज़ा आदि ने की। मौ० अरमान बाकरी ने कहा- मारका जीत के इस शान से घर जाते हैं, आयतें पढ़ते हुए नेज़ों पर सर जाते हैं। निजामत मौलाना आसिफ रजा बाकरी ने की। मजलिस को खिताब फरमाते हुए लखनऊ से तशरीफ़ लाए मौलाना मशरेक़ैन रिज़वी ने कहा कि इमाम हुसैन ने किसी ज़ालिम की बैअत कबूल नहीं की और इंसानियत एवं भाईचाराय का पैगाम देते हुए अपनी जान कुर्बान कर दी। कर्बला का जिक्र सुनकर अज़ादर जोर जोर से रो रहे थे। मजलिस के बाद बीबी जैनब के दोनों शहजादों औन व मोहम्मद की याद में दो जुल्जनाह बरामद हुए। जिसमें नोहा ख्वानी अकबर मेहंदी, जामिन बाकरी,मौ० वासिफ रजा आदि ने की। इस अवसर पर मुख्य रूप से हाजी अखलाक हुसैन, तफ़्सीरुल अब्बास, जहीन अब्बास, मौ० एहतेशाम, अदनान अली, मौ० फाजिल, जैन बाकरी, सलमान हैदर, फजले अकबर, जीशान हैदर, मौ० फुरकान, अफसर रजा,मौ० अयान, जहीर अब्बास, साहिल, हसन अब्बास, मौ० अख्तर अरमान बाक़री आदि भारी संख्या में लोग मौजूद रहे।



