गोड्डा

बिरनिया रेलवे गेट की बदहाल स्थिति, गेटमैन बोले – ‘रोज़ निकलते हैं सांप, टेलीफोन टूटा, सुनवाई नहीं

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
मेहरमा/गोड्डा: झारखंड के गोड्डा ज़िले में एनटीपीसी कहलगांव के लिए कोयला ढोने वाली रेलवे लाइन से प्रतिदिन दर्जनों मालगाड़ियाँ गुजरती हैं, जिससे केंद्र और राज्य सरकार को भारी राजस्व प्राप्त होता है। लेकिन इस विकास के केंद्र में बसे स्थानीय क्षेत्रों की स्थिति दयनीय बनी हुई है।
मेहरमा प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत बिरनिया गेट संख्या 10 पर गेटमैन के रहने के लिए बनाया गया कमरा जर्जर हालत में है। न खिड़कियाँ सही हैं, न दरवाज़े। टेलीफोन पांच वर्षों से टूटा पड़ा है। इतना ही नहीं, गेटमैन ने मीडिया से बातचीत के दौरान भावुक होते हुए बताया कि कमरे में रोज़ सांप निकलते हैं, जिससे उनकी जान जोखिम में बनी रहती है।
पीड़ित गेटमैन का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद रेलवे के उच्चाधिकारियों द्वारा केवल यह कहा जाता है कि “अगर समस्या है तो नौकरी छोड़ दीजिए।” ऐसे जवाब से कर्मचारी हताश और अपमानित महसूस कर रहे हैं।
गेटमैन ने बताया कि कभी समय पर वेतन नहीं मिलता, तो कभी उनसे ज़बरदस्ती अतिरिक्त काम लिया जाता है। इस तरह की प्रताड़ना से गेट पर तैनात कर्मचारी मानसिक तनाव में हैं।
उन्होंने झारखंड सरकार से मांग की है कि राज्य की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे सिंह अगर चाहें, तो इस समस्या का समाधान शीघ्र हो सकता है। साथ ही उन्होंने झारखंड के श्रम नियोजन मंत्री संजय प्रसाद यादव से भी आग्रह किया कि श्रमिकों की इस बदतर हालत पर संज्ञान लें और श्रम सुरक्षा की दिशा में ठोस पहल करें।
रेलवे जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था में कार्यरत कर्मचारी जब स्वयं असुरक्षित हैं, तो यह सवाल उठता है कि ‘विकास’ किसके लिए और किस कीमत पर?
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