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मुख्यमंत्री के आदिवासी गौरव सम्मेलन में आदिवासी महिला को ही नहीं मिला सम्मान..?

सोशल मिडिया पर सिंगरौली की जिला पंचायत अध्यक्ष सोनम सिंह का फूटा दर्द

नेशनल प्रेस टाइम्स ,ब्यूरो।
 सिंगरौली। सिंगरौली जिले में प्रदेश में महिला सशक्तिकरण और जनजातीय उत्थान के उद्देश्य से आयोजित होने जा रहे “सशक्त नारी और आदिवासी गौरव सम्मेलन” को लेकर अब विवाद खड़ा हो गया है। 4 जुलाई को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आगमन से पहले ही यह आयोजन राजनीतिक तूफान में घिरता नजर आ रहा है। कारण बना है सिंगरौली की जिला पंचायत अध्यक्ष सोनम सिंह का नाम इस कार्यक्रम के आमंत्रण पत्र से गायब होना।
कार्यक्रम में आदिवासी महिला को ही नहीं मिला सम्मान?
सोनम सिंह स्वयं एक आदिवासी महिला हैं और जिले की चुनी हुई प्रथम महिला प्रतिनिधि होने के साथ-साथ जनता द्वारा निर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्ष भी हैं। लेकिन इसके बावजूद सम्मेलन के निमंत्रण पत्र में उनका नाम तक शामिल नहीं किया गया। इसको लेकर उन्होंने सोशल मीडिया पर खुलकर नाराजगी जाहिर की है।
उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा.. “सशक्त नारी और आदिवासी गौरव सम्मेलन के आमंत्रण कार्ड में मुझे, एक आदिवासी महिला और जिला पंचायत अध्यक्ष होते हुए भी स्थान नहीं दिया गया। यह एक जानबूझकर किया गया अपमान है और यह दिखाता है कि सरकार के कुछ अधिकारी आदिवासियों और महिलाओं का गौरव बढ़ाने की बजाय उन्हें नीचा दिखाने में लगे हैं।”
सवालों के घेरे में प्रशासन?
सोनम सिंह के इस पोस्ट के बाद सिंगरौली जिले की राजनीति में हलचल मच गई है। सोशल मीडिया पर कई जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने जिला प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। लोग पूछ रहे हैं कि आख़िर महिला सशक्तिकरण के मंच पर ही महिलाओं को क्यों दरकिनार किया जा रहा है? और आदिवासी गौरव सम्मेलन से ही एक आदिवासी महिला को क्यों अपमानित किया गया?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह एक भारी चूक है और यह प्रशासन की एकतरफा कार्यशैली को उजागर करता है। कई लोगों का यह भी कहना है कि प्रशासन अब भाजपा संगठन की तरह व्यवहार कर रहा है और विपक्षी दलों या असहमत जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित करने से परहेज कर रहा है।
विपक्ष का हमला तेज
इस पूरे मामले को लेकर विपक्ष ने भी सरकार और जिला प्रशासन पर हमला बोलना शुरू कर दिया है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के स्थानीय नेताओं ने इसे “जनप्रतिनिधियों के अपमान” और “लोकतंत्र की हत्या” करार दिया है। उनका कहना है कि जब जनप्रतिनिधियों को ही नजरअंदाज किया जाएगा, तो आम जनता का क्या होगा?
क्या यह सिर्फ लापरवाही है या कुछ और?
अब बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या यह मात्र एक प्रशासनिक चूक है, या फिर जानबूझकर उठाया गया कदम? सोनम सिंह के मुताबिक यह कोई संयोग नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश है। अब प्रशासन पर यह जिम्मेदारी बनती है कि वह स्थिति स्पष्ट करे। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से पहले प्रशासन के लिए चुनौती 4 जुलाई को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आगमन तय है। ऐसे में इस विवाद ने पूरे कार्यक्रम पर राजनीतिक ग्रहण लगा दिया है। देखना यह होगा कि क्या मुख्यमंत्री खुद इस विषय पर कोई प्रतिक्रिया देते हैं या यह मुद्दा भी कई अन्य मुद्दों की तरह दबा दिया जाएगा।
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