कौशल भवन सभागार में आयोजित धर्मसभा में आचार्य श्री 108 नयन सागर जी मुनिराज ने दिया जागृति का संदेश
बड़ौत/बागपत। कौशल भवन सभागार में आज आयोजित धर्मसभा में वात्सल्य दिवाकर गुरु तीर्थ निर्मलायतन के प्रणेता, जागृतिकारी संत आचार्य श्री 108 नयन सागर जी मुनिराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा:
“जागो श्रावक जागो! जो जागता है वही पाता है, और जो सोता है वह खोता है।”
उन्होंने कहा कि प्रातःकाल का समय केवल प्रभु स्मरण के लिए होता है। दिनभर ऐसा कोई कर्म न करें कि रात को चैन से न सो सकें, और रात्रि में कोई ऐसा अपराध न करें कि सुबह अपने आप से नज़रें न मिला सकें।
मुनिराज ने जीवन के सुधार पर बल देते हुए कहा, “आप कुएं का सारा पानी शुद्ध नहीं कर सकते, लेकिन उसमें से लिए गए एक लोटे पानी को अवश्य साफ कर सकते हैं। उसी प्रकार, आप संसार को नहीं सुधार सकते, लेकिन अपने जीवन को जरूर सुधार सकते हैं।”
उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति सूर्योदय के समय सोता रहता है, उसका भाग्य कभी नहीं जागता। इसलिए आत्मा की जागृति के लिए संयम, ध्यान और प्रभु स्मरण आवश्यक है।
इस धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। मुख्य रूप से प्रवीण जैन, मनोज कुमार जैन, मनोज जैन संभव, पुनीत जैन, कमल जैन, आदेश जैन, दिनेश जैन, अनुराग मोहन, पवन जैन, राकेश जैन, सतीश जैन, अमित जैन सहित अनेक गणमान्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।



