गोड्डा

मधुश्रावणी पूजा आरम्भ, पूजा-अर्चना में जुटीं नवविवाहिताएं

- शिव-पार्वती की कथा और गीतों से सामुकित्ता गांव का माहौल भक्तिमय

  नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
गोड्डा/महागामा : मिथिलांचल की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा मधुश्रावणी व्रत मंगलवार से आरंभ हो गया। वहीं प्रखंड के सामुकित्ता गांव में नवविवाहिताएं पारंपरिक वेशभूषा में सजी-धजी कोहबर में बैठकर विधिवत पूजा-अर्चना कीं और व्रत की शुरुआत की। पूजा के दौरान शिव-पार्वती की कथा का श्रवण किया गया। कथा वाचन कर रहीं साधना देवी ने कहा कि मधुश्रावणी व्रत नवविवाहिताओं को पारिवारिक जिम्मेदारियों और जीवन के मूल्यों से जोड़ता है।
नवविवाहिता साक्षी झा ने बताया कि यह उनका पहला मधुश्रावणी व्रत है। यह व्रत पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की समृद्धि के लिए किया जाता है। इस दौरान महिलाएं 14 दिनों तक बिना नमक का फलाहार व अरवा भोजन लेती हैं और कथा, भजन-पूजन में भाग लेती हैं। पूजन स्थल को परंपरागत ढंग से सजाया गया था। कलश स्थापना, चांदी के नाग-नागिन, महादेव-पार्वती की प्रतिमा, बेलपत्र, फल और पकवानों से पूजा की गई। विषहरी माता, भोला बाबा और कोहबर गीतों की गूंज से माहौल भक्तिमय बना रहा। वहीं मायके से पूजा सामग्री, वस्त्र व पकवान भेजे जाते हैं। वहीं, प्रतिदिन की पूजा के बाद भाई द्वारा बहन को उठाने की रस्म निभाई जाती है। व्रत की अंतिम दिन ‘टेमी दागने’ की परंपरा निभाई जाती है, साथ ही सुहागिनों को मेहंदी, सिंदूर और सुहाग सामग्री भेंट की जाती है।
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