सिंगरौली

देवसर के गन्नई पंचायत में 2 लाख लागत का निर्माणाधीन जलाशय, पहली बारिश भी नहीं झेल पाया। 

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।

सिंगरौली। जिले के जनपद पंचायत देवसर अंतर्गत ग्राम पंचायत गन्नई में भ्रष्टाचार की बुनियाद पर खड़ी एक निर्माण कार्य की पोल पहली ही बारिश में खुल गई। यहां लगभग 2 लाख रुपये की लागत से बनाया जा रहा नाला बंधान कार्य महज 2 दिनों में ही बारिश की पहली बौछार में बह गया। अब ग्रामीणों द्वारा इस नाला बंधान का फूट जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया है, जिसने प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। ग्राम गन्नई सिंगरौली जिला मुख्यालय से लगभग 70 किलोमीटर दूरी पर स्थित है, जहां विकास के दावे कागजों तक सीमित नजर आते हैं। ग्रामीणों ने बताया नाला बंधान निर्माण के दौरान ही गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे थे। लेकिन जब लोगों ने इसकी शिकायत की, तो स्थानीय जनपद और पंचायत स्तर पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। लोगों का आरोप है कि नाला बंधान कार्य का बेस नियमानुसार नहीं बनाया गया, जिससे बारिश का पानी बहते ही नाला बंधान निर्माण कार्य फुट कर बह गया।
सूत्रों के अनुसार, निर्माण कार्य की निगरानी के लिए तैनात इंजीनियर अभिषेक विश्वकर्मा ने भी निर्माण एजेंसी को खुली छूट दे दी, संभवतः कमीशन के लेन-देन के चलते। यही कारण रहा कि नाला बंधान कार्य की मजबूती केवल दिखावटी रही और उसका वास्तविक स्तर पहली ही बारिश में सामने आ गया। ग्रामीणों ने इस घटना का मोबाइल से वीडियो बनाकर इंस्टाग्राम, फेसबुक और व्हाट्सएप पर शेयर किया, जो अब तेजी से वायरल हो रहा है। इस वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि मिट्टी से बना नाला बंधान निर्माण कार्य जमीन से अलग होकर पूरी तरह बह रहा है।
“हमें नाम का नाला बंधान नहीं, मज़बूती चाहिए। कुछ दिन की सुविधा के नाम पर इस तरह से पैसा बहाया जा रहा है। अगर यही हाल रहा, तो आने वाले समय में मनरेगा योजना मखौल बन के रह जाएंगी,” — ऐसा कहना है गांव के ही एक बुजुर्ग का।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जांच हो और उन पर कड़ी कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही फिर से फूटा हुआ नाला बंधान कार्य निर्माण को बचे हुए पैसे से अच्छे से बनवाया जाए, पूरी गुणवत्ता के साथ हो, जिससे सरकारी पैसे की बर्बादी रोकी जा सके।
यह घटना सिर्फ एक नाला बंधान खेत तलाव की नहीं, बल्कि गांवों में चल रहे भ्रष्टाचार और दिखावटी विकास की हकीकत को उजागर करती है। सवाल यह उठता है कि क्या जिम्मेदार विभाग इस पर कार्रवाई करेगा, या फिर यह मामला भी बाकी मामलों की तरह फाइलों में दफन होकर रह जाएगा?
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