मथुरा

आखिर क्यों एक काला नाग लोगों को काट रहा? मथुरा में एक की मौत और दो गंभीर, 

कुछ दिन पहले नामकरण में मारा था एक सांप

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
मथुरा। महावन में ये किसी नागिन फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि सच्चाई है। महावन तहसील का गांव सिहोरा 13 दिन से एक नागिन को लेकर आसपास क्षेत्र में सुर्खियों में रहा। दो जुलाई को एक परिवार के यहां आयोजित नामकरण संस्कार में निकले नाग को एक रिश्तेदार ने लाठियों से मार डाला। तब से नागिन ने बदला लेने के लिए उसी घर को अपना ठिकाना बना लिया था।बीते दिन उसने इसी परिवार के एक सदस्य को डंस कर मार डाला। शुक्रवार की रात्रि में दो रिश्तेदारों को डंस लिया। सुबह चार बजे से ये गांव बायगीरों का अड्डा बन गया। दो बायगीरों की 16 सदस्यीय टीम ने चार घंटे तक यहां बीन व थाली बजाकर उस नागिन को पकड़ कर डिब्बे में बंद कर ले गए। अब भी स्वजन नागिन के अधूरे बदला को लेकर दहशत में हैं। सिहोरा के मनोज कुमार की पत्नी दुर्गेश के पिछले महीने बेटी हुई थी। दो जुलाई को बच्ची का नामकरण संस्कार हुआ था। समारोह में दुर्गेश का भाई हाथरस के नगला छौंक निवासी सचिन आया हुआ था। स्वजन के अनुसार, नामकरण संस्कार के दिन मनोज के घर में नाग (सर्प) निकल आया। सचिन ने लाठियों से प्रहार कर उसे मार डाला। दूसरे दिन सचिन अपने गांव चला गया। चार दिन बाद मनोज के घर में काले रंग की एक नागिन दिखाई दी। उसे देख स्वजन दहशत में आ गए। शोरगुल पर नागिन घर के अंदर ही कहीं छिप गई। बुधवार की रात मनोज अपने पत्नी बच्चों के साथ घर के अंदर सो रहे थे। गुरुवार की सुबह चार बजे नागिन ने मनोज को डंस लिया। मनोज ने नागिन को डंसने के बाद जाते हुए देखा था। सुबह बायगीर बुलाए, लेकिन तबीयत बिगड़ने पर स्वजन उसे निजी अस्पताल ले गए। डाक्टर ने जयपुर ले जाने की सलाह दी, लेकिन रास्ते में मनोज ने दम तोड़ दिया। इसके बाद पूरा परिवार दहशत में आ गया। मनोज की मृत्यु पर शनिवार को मनोज के जीजा दिनेश निवासी भदनवारा उसके यहां घर शोक व्यक्त करने आएं थे। स्वजन ने उन्हें रात्रि में रोक लिया। शनिवार की रात दिनेश एवं मनोज का बड़ा भाई पप्पू एक कमरे में एक ही बेड पर सो गए। रात्रि लगभग 12 नागिन आई और दोनों को डंस लिया। जहर का असर होते ही दोनों की नींद टूट गई। स्वजन भी एकत्र हो गए। स्वजन उन्हें अस्पताल ले गए। रविवार की सुबह छह बजे सिहोरा एवं अनौड़ा गांव से दो बायगीर बुलाए गए।बायगीरों के साथ आए 16 अन्य सदस्यों ने नागिन को पकड़ने का काम शुरू कर दिया। बीन की धुन से पूरा गांव गूंज उठा। ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। करीब चार घंटे की कवायद के बाद बायगीरों ने नागिन को घर के अंदर से ही पकड़ कर डिब्बे में बंद कर लिया। मृतक के भाई राजू का कहना है कि दोनों लोग अब ठीक हैं, उनका अस्पताल में उपचार चल रहा है।
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