राजनीतिलखनऊ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ऐतिहासिक फैसला

पूर्वी पाकिस्तान के विस्थापित परिवारों को मिलेगा भूस्वामित्व

 

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) से विस्थापित होकर उत्तर प्रदेश में बसे हजारों परिवारों को विधिसम्मत भूस्वामित्व प्रदान करने का ऐतिहासिक निर्देश जारी किया है। यह निर्णय पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बिजनौर, रामपुर और बरेली जैसे जिलों में बसे 10,000 से अधिक परिवारों के लिए जीवन बदलने वाली राहत लेकर आया है। मुख्यमंत्री ने इस पहल को सामाजिक न्याय, मानवता और राष्ट्रीय जिम्मेदारी का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह कदम दशकों से उपेक्षित परिवारों को सम्मान और आर्थिक स्थिरता प्रदान करेगा।

निर्णय की मुख्य विशेषताएँ

. लाभार्थी: लगभग 10,000 परिवार, जो पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बिजनौर, रामपुर और बरेली में बसे हैं।

. उद्देश्य: राजस्व अभिलेखों में परिवारों के नाम दर्ज कर उन्हें पूर्ण भूस्वामित्व अधिकार प्रदान करना।

. प्रमुख क्षेत्र: पीलीभीत के टाटरगंज, बमनपुर, बेलहा, शास्त्री नगर, रामनगर, गांधीनगर, श्रीनगर जैसे गाँवों के साथ-साथ रामपुर के 23 और बिजनौर के 18 गाँव।

. कानूनी ढांचा: पूर्व में गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट (2018 में निरस्त) के तहत आवंटित भूमि के लिए नए विधिक प्रावधानों के तहत स्वामित्व हस्तांतरण।

. मुख्यमंत्री का संदेश: “यह केवल पुनर्वास नहीं, बल्कि उन परिवारों को गरिमा और न्याय देने की राष्ट्रीय जिम्मेदारी है, जिन्होंने भारत को अपना घर बनाया।”

दशकों का संघर्ष

1960 से 1975 के बीच, विभाजन और उसके बाद की परिस्थितियों के कारण पूर्वी पाकिस्तान से हजारों परिवार उत्तर प्रदेश में शरण लेने को मजबूर हुए। इन परिवारों को पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बिजनौर, रामपुर और बरेली में ट्रांजिट कैंपों के माध्यम से बसाया गया और कृषि भूमि आवंटित की गई। हालांकि, राजस्व अभिलेखों में त्रुटियों, वन विभाग की भूमि पर कब्जे, और नामांतरण प्रक्रिया में देरी के कारण अधिकांश परिवारों को वैध स्वामित्व नहीं मिल सका। कई परिवार दशकों से खेती और स्थायी आवास के बावजूद कानूनी मालिकाना हक से वंचित रहे।

सरकारी कार्रवाई : पारदर्शिता और संवेदनशीलता पर जोर

लखनऊ में सोमवार को आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए:

. पारदर्शी प्रक्रिया: स्वामित्व हस्तांतरण में पूरी पारदर्शिता और संवेदनशीलता बरती जाए।

. अभिलेख सुधार: राजस्व रिकॉर्ड में त्रुटियों को ठीक कर परिवारों के नाम दर्ज किए जाएँ।

. कानूनी समाधान: वन भूमि, चरागाह या तालाब जैसी आरक्षित भूमि पर बसे परिवारों के लिए सुप्रीम कोर्ट की अनुमति सहित वैकल्पिक उपाय तलाशे जाएँ।

. कैबिनेट उप-समिति: स्वामित्व अधिकारों के लिए नियमों में शिथिलता और नए ढांचे के लिए कैबिनेट उप-समिति गठन की संभावना।

पिछले प्रयास और संदर्भ

योगी सरकार ने इससे पहले भी विस्थापितों और वंचित समुदायों के लिए कई कदम उठाए हैं:

. 2022 में पुनर्वास: कानपुर देहात के रसूलाबाद में 63 हिंदू बंगाली परिवारों को 2 एकड़ कृषि भूमि, 200 वर्ग मीटर आवासीय भूमि और मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत लाभ प्रदान किए गए।

. उत्तराखंड मॉडल: उत्तराखंड में शरणार्थी परिवारों को निशुल्क या न्यूनतम मूल्य पर स्वामित्व अधिकार दिए गए, जिसे उत्तर प्रदेश में लागू करने की दिशा में काम शुरू हुआ है।

. अन्य समुदायों के लिए प्रयास: 2017 से वनटांगिया, मुसहर और कोल समुदायों के लिए पुनर्वास और आवास योजनाएँ चल रही हैं।

निर्णय का प्रभाव

. आर्थिक सशक्तीकरण: भूस्वामित्व अधिकार मिलने से परिवार बैंक ऋण, कृषि योजनाओं और अन्य सरकारी लाभों का उपयोग कर सकेंगे।

. सामाजिक सम्मान: यह कदम परिवारों को मुख्यधारा में लाकर उनके आत्मसम्मान को बढ़ाएगा।

. ऐतिहासिक महत्व: भारतीय जनता पार्टी के जिला पंचायत सदस्य मनजीत सिंह ने इसे तीन पीढ़ियों के संघर्ष का सम्मानजनक समाधान बताया।

चुनौतियाँ और समाधान की राह

. कानूनी जटिलताएँ: गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट के निरस्त होने के बाद नए विधिक ढांचे की आवश्यकता।

. अभिलेखीय त्रुटियाँ: राजस्व रिकॉर्ड में सुधार के लिए स्थानीय प्रशासन को सत्यापन करना होगा।

. वन भूमि: वन विभाग की भूमि पर बसे परिवारों के लिए विशेष अनुमति की जरूरत।

आगे की दिशा

प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि वह शीघ्रता से राजस्व अभिलेखों को अद्यतन करे और स्वामित्व हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू करे। वन भूमि से संबंधित मामलों में कानूनी समाधान तलाशे जाएँगे। यह निर्णय उत्तर प्रदेश सरकार की उस प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है, जो सामाजिक समावेश और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए निरंतर कार्यरत है। मुरादाबाद मंडलायुक्त आन्जनेय कुमार सिंह की अध्यक्षता वाली कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 20,000 शरणार्थी परिवार 50,000 एकड़ भूमि पर काबिज हैं, लेकिन स्वामित्व अधिकारों का अभाव रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय भारत की शरणार्थी नीति को और मजबूत करेगा।

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