लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय बने IIM कोलकाता के निदेशक, प्रो. मनुका खन्ना को कार्यवाहक कुलपति का जिम्मा

लखनऊ : विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय को भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) कोलकाता का निदेशक नियुक्त किया गया है। भारत की राष्ट्रपति और IIM की विजिटर द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय प्रबंधन संस्थान अधिनियम, 2017 (संशोधित 2023) की धारा 16(2) के तहत इस नियुक्ति को मंजूरी दी है। इस नियुक्ति के बाद प्रो. राय को लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति पद से मुक्त कर दिया गया है, और प्रति कुलपति प्रो. मनुका खन्ना को उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल द्वारा कार्यवाहक कुलपति का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है।
प्रो. आलोक कुमार राय का लखनऊ विश्वविद्यालय में कार्यकाल अत्यंत उल्लेखनीय रहा है। उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय ने NAAC से A++ ग्रेड हासिल किया, जो उत्तर प्रदेश में पहली बार हुआ, और NIRF रैंकिंग में देश के शीर्ष 100 संस्थानों में 32वां स्थान प्राप्त किया। प्रो. राय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को लागू करने, LUCODE (लखनऊ विश्वविद्यालय सेंटर फॉर ऑनलाइन एंड डिस्टेंस एजुकेशन) और SLATE डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म की शुरुआत करने, तथा विश्वविद्यालय के बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण सुधार किए। उनकी उपलब्धियों ने लखनऊ विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दिलाई।
शिक्षा मंत्रालय ने IIM कोलकाता के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स को पत्र जारी कर प्रो. राय की नियुक्ति की पुष्टि की है। बोर्ड जल्द ही नियुक्ति पत्र जारी करेगा, जिसके बाद प्रो. राय अपनी स्वीकृति जमा करेंगे। यह नियुक्ति इसलिए भी ऐतिहासिक है, क्योंकि यह पहली बार है जब लखनऊ विश्वविद्यालय के किसी कुलपति को IIM जैसे प्रतिष्ठित केंद्रीय संस्थान का नेतृत्व करने का अवसर मिला है। साथ ही, यह एक गैर-IIM प्रोफेसर की IIM निदेशक के रूप में नियुक्ति का दुर्लभ उदाहरण है।
दूसरी ओर, कार्यवाहक कुलपति का जिम्मा संभाल रहीं प्रो. मनुका खन्ना लखनऊ विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष हैं। राजभवन के आदेश के अनुसार, वह अगले कुलपति की नियुक्ति तक यह जिम्मेदारी निभाएंगी।
लखनऊ विश्वविद्यालय के समुदाय ने प्रो. राय को उनकी उपलब्धियों के लिए बधाई दी है और उनकी नई भूमिका में सफलता की कामना की है। साथ ही, प्रो. खन्ना के नेतृत्व में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यों को निर्बाध रूप से जारी रखने की उम्मीद जताई जा रही है।



