सिंगरौली
उर्जाधानी में झोलाछाप डॉक्टरों का बोलबाला, बीमारी कोई भी हो ईलाज यही होगा !
एमबीबीएस डॉक्टरों को भी मात दे रहे झोलाछाप डॉक्टर, मरीजों की जान से हो रहा खिलवाड़

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली । सिंगरौली जिले में झोलाछाप डॉक्टरों का बोलबाला इस कदर बढ़ चुका है कि अब ये फर्जी डॉक्टर एमबीबीएस और प्रशिक्षित चिकित्सकों को भी पीछे छोड़ते नज़र आ रहे हैं। जिले के शहरी और विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में मकड़ी के जाल की तरह फैल चुके ये फर्जी चिकित्सक तमाम तरह की बीमारियों का इलाज करने का दावा करते हैं। चिंता की बात यह है कि इनका इलाज कई बार लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है, लेकिन फिर भी प्रशासन की आंखें मूंदे बैठी हैं। आप को बता दे कि जिले में लंबे समय से झोलाछाप डॉक्टर क्लिनिक खोलकर मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं. ऐसा नहीं है कि इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को नहीं है। झोलाछाप डाक्टरों के इलाज से कई मरीज काल के गाल में समा चुके है. इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग कुंभकरणी नींद में है. गौरतलब है कि खुटार क्षेत्र में हाल ही में एक बेहद दुखद घटना सामने आई, जहां 9 महीने की गर्भवती महिला की जान झोलाछाप डॉक्टर के इलाज की वजह से चली गई। परिजनों ने महिला की मौत के बाद जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई, लेकिन अब तक दोषी फर्जी डॉक्टर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। यह एकमात्र मामला नहीं है, बल्कि जिले में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें झोलाछाप डॉक्टरों की लापरवाही से मरीजों की जान गई है। स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर सवाल उठना लाजमी है। वर्षों से इन झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कोई कठोर कदम नहीं उठाया गया है। बताया जा रहा है कि कई स्थानीय राजनेताओं का इन झोलाछाप डॉक्टरों को संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते अधिकारी भी इन पर हाथ डालने से कतराते हैं। परिणामस्वरूप यह फर्जी डॉक्टर बेखौफ होकर मरीजों की जान से खिलवाड़ करते जा रहे हैं।
मनमानी रकम लेकर करते हैं इलाज, दवाइयों की भरमार
वैसे तो झोलाछाप डॉक्टर फोड़ा-फुंसी या सिर दर्द जैसी बीमारी का इलाज करने के लिए भी अधिकृत नहीं है, लेकिन इलाज एमबीबीएस की तरह करते है गांव के ग्रामीणों को यह बड़ा डॉक्टर बताकर ठग रहे है और स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. यह डॉक्टर मलेरिया, खांसी, सर्दी-जुकाम सहित कई बीमारियों का इलाज भी करते है. भोली भाली जनता से पैसा वसूलने के लिए यह डॉक्टर मरीज को भर्ती करके ड्रिप चढ़ाने, इंजेक्शन लगाने सहित घायलों को पट्टी करने और कई बार टांके लगाने तक के काम कर लेते है. झोलाछाप डॉक्टरों की लापरवाही से कई लोग अपनी जान गवां चुके है. बिना जांच पड़ताल के मरीजों के ऊपर नये-नये प्रयोग इनके द्वारा किया जा रहा है. सूत्रों से जानकारी मिली कि झोलाछाप डॉक्टर व स्वास्थ्य विभाग की सांठ-गांठ से झोलाछाप डॉक्टर बेखौफ होकर बड़े-बड़े साइन बोर्ड लगाकर बैठे है. जिला मुख्यालय से कोई भी बड़े अधिकारी क्षेत्र का दौरा करते है तो इसकी सूचना इनको पहले मिल जाती है और ये शटर बंद कर रफूचक्कर हो जाते है और अधिकारी के जाने के बाद फिर से इलाज शुरू कर देते है. अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग झोलाछाप डॉक्टरों पर कब ठोस कार्रवाई करेगा।
इलाज के नाम पर मौत का खेल
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी गंभीर है। यहां झोलाछाप डॉक्टर खुलेआम क्लीनिक चला रहे हैं और बिना किसी योग्यता के इंजेक्शन, ड्रिप, और गंभीर बीमारियों का इलाज कर रहे हैं। हालत बिगड़ने पर ये डॉक्टर मरीजों को जिला चिकित्सालय या ट्रामा सेंटर रेफर कर देते हैं, जहां पहुंचने से पहले ही कई मरीज दम तोड़ देते हैं। जानकारी के अनुसार, इन अवैध क्लिनिक में मरीज की जांच से लेकर दवाइयां, भर्ती करने के लिए बेड, आदि सब कुछ है, लेकिन डॉक्टरों के पास उचित डिग्री नहीं है. ऐसे में समझ सकते है कैसे इलाज होता है. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के आसपास से लेकर क्षेत्र की जनता का स्वास्थ्य झोलाछाप डाक्टरों के हाथ में चला गया है. झोलाछाप डाक्टरों ने गांवों में पांव पसार रखा हैं. एक मकान या दुकान किराये पर लेकर झोलाछाप डॉक्टर अपना क्लिनिक खोलकर बैठ गये है. चिकित्सा विभाग व प्रशासन द्बारा ठोस कार्रवाई नहीं होने से झोलाछाप धड़ल्ले से जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे है।
बंगाली झोलाछाप डॉक्टरों की बढ़ती संख्या और शासन की उदासीनता
सिंगरौली जिले में विशेष रूप से बंगाली झोलाछाप डॉक्टरों की संख्या में बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। ये बिना किसी डिग्री या लाइसेंस के इलाज कर रहे हैं, और शासन-प्रशासन की अनदेखी ने इन्हें और अधिक बेखौफ बना दिया है। वहीं, प्रदेश के अन्य जिलों जैसे कि सीधी में इन फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई हुई है, लेकिन सिंगरौली में ऐसा कोई प्रयास नहीं दिखता।
क्या होगा समाधान ?
अब सवाल यह उठता है कि प्रशासन आखिर कब जागेगा? क्या किसी बड़ी जनहानि के बाद ही इन झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई होगी? क्या जनता की जान से ज्यादा किसी के राजनीतिक हित महत्वपूर्ण हैं? स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन और पुलिस को मिलकर जल्द से जल्द इन झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ अभियान चलाना चाहिए। साथ ही जनजागरूकता भी जरूरी है ताकि ग्रामीण और कम शिक्षित लोग ऐसे फर्जी चिकित्सकों के जाल में न फंसे।
इनका कहना है।
समाज सेवी अंबिका प्रसाद के द्वारा कहा गया कि स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन और पुलिस को मिलकर जल्द से जल्द इन झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ अभियान चलाना चाहिए। साथ ही जनजागरूकता भी जरूरी है ताकि ग्रामीण और कम शिक्षित लोग ऐसे फर्जी चिकित्सकों के जाल में न फंसे।
जब इन सभी मामलों को लेकर जिला स्वास्थ्य अधिकारी से बात की गई तो उनके द्वारा कहा गया कि हमें अभी कोई जानकारी है इन सब के बारे में मैं अभी-अभी में आया हूं जानकारी लेकर आपको अवगत कराया जाएगा।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी
पंकज सिंह



