सिंगरौली
डबल डीएस ने मिलाया हाथ, कोयले के मिलावट में साथ, प्रशासन की मौन सहमति,
छाई किंग बनने की फ़िराक में भाजपा नेता, जनता, पत्रकार व जनप्रतिनिधि कर रहे छापेमारी

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली । सिंगरौली जिला ऊर्जाधानी के नाम से देशभर में मशहूर है इन दिनों एक बार फिर कोयले में मिलावट के गोरखधंधे को लेकर सुर्खियों में है। जहां एक ओर यह जिला देश को ऊर्जा देने का केंद्र बिंदु है, वहीं दूसरी ओर यहां कोयले में मिलावट का संगठित खेल खुलेआम खेला जा रहा है। इस मामले को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों द्वारा अधिकारियों को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की गई है, लेकिन अफसोस की बात यह है कि अब तक किसी भी स्तर पर ठोस कदम नहीं उठाया गया है।देश में कोयले की बढ़ी मांग को देखते हुए कोल माफिया ऊर्जांचल में काफी सक्रिय है। लोहा फैक्ट्री का चूर्ण-कचरा (चारकोल) को भारी मात्रा में बाहर से लाकर कोयले में मिलावट कर दूर-दराज के तापीय परियोजनाओं में रेल मार्ग से भेजा जा रहा है। सिंगरौली जिले के अंतर्गत गोदवाली ,बरगवां व मोरवा रेलवे साइडिग पर हजारों टन चारकोल आ रहा है। जिसे कोयला में मिलाकर रेलवे रैक में लोड कर प्रेषण किया जा रहा है। ट्रांसपोर्टर उत्तम कोयला छांटकर मंडी में बिक्री के लिए भेज देते हैं। उसकी जगह पर चारकोल मिलाकर उद्योगों को प्रेषित कर रहे हैं। इस अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए कोई विभाग पहल नहीं कर रहा है।
कई बार भस्सी व छाई से लोड गाड़ियां पकड़ी गई
ताजा घटनाक्रम की बात करें तो स्थानीय पत्रकारों द्वारा पिछले कई दिनों से लगातार स्टिंग ऑपरेशन चलाया जा रहा था, जिसके तहत कल रात भस्सी क्षेत्र में दो भारी वाहनों को रिजेक्ट कोयले से मिलावट करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। पत्रकारों ने तत्परता दिखाते हुए तत्काल नजदीकी थाना को सूचना दी और कार्रवाई की मांग की, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से पुलिस प्रशासन की प्रतिक्रिया बेहद धीमी रही।
डबल डीएस ने मिलाया हाथ, कोयला के मिलावट में साथ
स्थानीय सूत्रों की मानें तो इस मिलावट के खेल में प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर राजनैतिक संरक्षण तक की गहरी संलिप्तता है। खासतौर पर डबल डीएस मिलकर बेख़ौफ़ कार्य को अंजाम दे रहे है अधिकारियों पर आरोप लग रहे हैं कि उन्होंने जानबूझकर इस मामले में आंखें मूंद रखी हैं। प्रशासन की मौन सहमति के चलते कोयला माफिया लगातार बेखौफ होकर अपने मंसूबों को अंजाम दे रहे हैं।
भाजपा नेता ‘किंग’ बनने की फिराक में
सूत्र बताते है कि मामले को और गंभीर बना रहा है एक भाजपा नेता का नाम, जो इलाके में ‘कोयला किंग’ बनने की महत्वाकांक्षा पाले हुए है। जानकारी के अनुसार यह नेता पूर्व में भी गैंगवार की घटनाओं में संलिप्त रहा है और एक बार फिर वही स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इससे न सिर्फ कानून व्यवस्था पर संकट गहराएगा, बल्कि पूरे क्षेत्र की शांति भी भंग हो सकती है।
वापस लौट आया संदिग्ध प्रधान आरक्षक – दोबारा हिंसा की संभावना
सूत्र बताते है कि पूर्व में कोयला मिलावट मामलों में संलिप्त रहे प्रधान आरक्षक की पुनः तैनाती उसी क्षेत्र में की गई है, जिससे एक बार फिर कोयले के काले खेल को पुनः अंजाम तक पहुंचाया जा सके। बताया तो यह भी जाता है कि बिना इस प्रधान आरक्षक के कोयले में मिलावट का कारोबार भी धीमा पड़ जाता है। इसलिए जोर आजमाइश लगाकर एक ही थाने में बार बार पदस्थापना करा लिया जाता है। आप को बता दे पूर्व में मिलावट के कार्य को लेकर दो गुटों में गैंगवार भी हो चुकी है और लोगो में चर्चा है की एक बार पुनः वही स्थिति बनती हुई दिखाई पद रही है।
गोदावरी, प्रापक कोल व माँ काली कंपनी पर आरोप
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार गोदावरी और प्रापक कोल कंपनियों पर विशेष रूप से कोयले में मिलावट का आरोप लगाया जा रहा है। इन कंपनियों पर गोदवाली, बरगवां, और मोरवा रेलवे साइडिंग पर मिलावटी कोयला मालगाड़ियों में लोडिंग कराने का आरोप है। सूत्रों की मानें तो बरगवां, गोदवाली और मोरवा रेलवे साइडिंग पर इस अवैध कारोबार का संचालन बड़े पैमाने पर हो रहा है। सूत्रों की माने तो प्रापक कोल कंपनी (डीएस), गोदावरी कमोडिटीज लिमिटेड द्वारा कोयला में मिक्सिंग कर पावर संयंत्र ललितपुर थर्मल पावुर, बजाज एनर्जी लिमिटेड और प्रयागराज पावर प्लांट को मिलावटी कोयला भेजा जा रहा है। वही सूत्र बताते है कि माँ काली ट्रेडर्स प्रयागराज पावर का काम करती है और यह कंपनी भी मिलावटी कोयला सप्लाई कर रही है जिससे साफ जाहिर होता है कि प्रयागराज के अधिकारियों की भी मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता है। छाई (चारकोल) और भस्सी मिलावट का बड़ा खेल शुरू हो गया है।
जनता और पत्रकार उतरे मैदान में – प्रशासन मौन
संपूर्ण घटनाक्रम के सामने आने के बाद अब आम जनता, पत्रकार संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने मोर्चा खोल दिया है। लगातार छापेमारी कर गड़बड़ियों को उजागर किया जा रहा है। अब देखना यह है कि शासन और प्रशासन कब तक इन गंभीर मामलों पर चुप्पी साधे रहते हैं, या फिर कोई ठोस कार्रवाई सामने आएगी। सिंगरौली में कोयले की मिलावट का यह गोरखधंधा न सिर्फ जिले की साख को धूमिल कर रहा है, बल्कि देश की ऊर्जा आपूर्ति को भी प्रभावित करने की स्थिति में पहुंच चुका है। ऐसे में ज़रूरत है एक उच्चस्तरीय जांच और कठोर कार्रवाई की, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि ऊर्जा राजधानी की असली तस्वीर क्या है – विकास या भ्रष्टाचार?



