जयपुर
टंकी पर चढ़ने का नाटक फर्जी दस्तावेजों की जांच से बचने की कोशिश,
जमीन विवाद में अचरोल गृह निर्माण सहकारी समिति के फर्जी पट्टों का मामला
2022 से दर्ज है धोखाधड़ी की रिपोर्ट, आरोपियों पर पहले से FIR दर्ज-पुनीत कर्णावट
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
जयपुर। जयपुर के प्रताप नगर इलाक़े में पानी की टंकी पर छह लोगों के चढ़ने के मामले पर डिप्टी मेयर पुनीत कर्णावट का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन अचरोल गृह निर्माण सहकारी समिति के फर्जी पट्टों के आरोपियों द्वारा पुलिस जांच को प्रभावित करने की मंशा से किया गया था। 10 जून 2025 को कुछ लोगों द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बेबुनियाद दावे किए गए थे जिनके विरुद्ध 12 जून को प्रतापनगर थाने में FIR संख्या 441/2025 दर्ज की गई। पुलिस ने जब उनसे दस्तावेज मांगे तो वे फर्जी निकले। आरोप है कि मुख्य अभियुक्तों ने ही अपने लोगों को टंकी पर चढ़ने के लिए उकसाया ताकि पुलिस पर दबाव बनाया जा सके।इससे पहले भी FIR संख्या 549/2022 के तहत ‘जगदीश धाम’ योजना के फर्जी पट्टों का मामला दर्ज हो चुका है। जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि प्राइम बिल्ड होम प्राइवेट लिमिटेड द्वारा वर्ष 2005 में संबंधित ज़मीन की रजिस्ट्री वैध रूप से करवाई गई थी और सभी भुगतान चेक से किए गए थे।
जयपुर विकास प्राधिकरण और सहकारिता विभाग की रिपोर्ट के अनुसार अचरोल समिति ने कभी ‘जगदीश धाम’ नाम से कोई योजना बनाई ही नहीं। 1976 से 2005 तक की सरकार के सहकारिता विभाग की ऑडिट रिपोर्ट बताती है कि समिति के पास भूमि खरीदने लायक न तो पूंजी थी और न ही वैधानिक अधिकार था , इस दौरान अचरोल गृह निर्माण सहकारी समिति ने एक गज भूमि भी किसी से भी क्रय नहीं की है, इतना ही नहीं, 2015 में राज्य सरकार ने इस समिति का पंजीकरण भी रद्द कर दिया था, क्योंकि इसके कामकाज में भारी गड़बड़ियां पाई गई थीं। एक अहम गवाह देशराज बेरवा ने भी अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि उसने कभी कोई एग्रीमेंट समिति के पक्ष में नहीं किया और न ही ‘जगदीश धाम’ के पट्टे जारी किए। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह पूरा घटनाक्रम कानून से बचने की कोशिश के तहत एक सुनियोजित ड्रामा था जो अब पूरी तरह उजागर हो चुका है।


