गोड्डा
दोषी को सजा दिलाने में स्टेक होल्डरों की भूमिका अहम : पीडीजे
- व्यवहार न्यायालय के लाइब्रेरी हाल में डालसा की ओर से जिला स्तरीय मल्टी स्टेक होल्डर्स कन्सलटेंसन कार्यक्रम आयोजित

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
गोड्डा : झारखंड विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से रविवार को व्यवहार न्यायालय के लाइब्रेरी सभागार में जिला स्तरीय मल्टी स्टेक होल्डर्स कन्सलटेसन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान बच्चों को न्याय सुलभ कराने को लेकर पोक्सा एक्ट एवं जुबिनाइल जस्टिस के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई। इसका शुभारंभ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष सह पीडीजे रमेश कुमार, जिला जज प्रथम कुमार पवन, प्राधिकरण के सचिव दीपक कुमार, रजिस्टार सतीश कुमार मुंडा, सदर एसडीपीओ जेपीएन चौधरी, महागामा एसडीओ आलोक वरण केशरी, महागामा एसडीपीओ चंद्रशेखर आजाद, सिविल सर्जन सुभाष चंन्द्र शर्मा, प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी मुक्ति भगत, विधि सह परवीक्षा पदाधिकारी राजेश गुप्ता, डीएस डॉ० ताराशंकर झा आदि ने संयुक्त रुप से दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम का संचालन डालसा के सचिव दीपक कुमार कर रहे थे। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रमेश कुमार ने कहा कि पोक्सो एवं जुबिनाइल जस्टिस में पीड़िता को न्याय सुलभ कराने को लेकर मल्टी स्टेक होल्डर की भूमिका अहम है।
दोनों कानून बच्चा के विषय में है। एक तरफ अपराध करने वाला है दूसरा विक्टिम है। एक्ट की जानकारी होने पर बेहतर तरीके से काम कर सकते हैं। पुलिस अधिकारी को जागरूक होने की जरूरत है। किसके सामने गवाही करानी है सबकी जानकारी होना जरूरी है। पुलिस जाकर गवाही ले थाने लाने की जरूरत नहीं है।सोसाइटी को सुधारना सुधारने की जरूत है। ऐसे में स्टेक होल्डरों को समय-समय पर कानून में हो रहे बदलाव व सुझाव से संबंधित जानकारी रखने की जरुरत है। स्टेक होल्डर के रूप में पीड़ित या पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए पुलिस, बाल कल्याण समिति, चिकित्सा पदाधिकारी, लोक अभियोजक, अधिवक्ता आदि की भूमिका अहम है। परिचर्चा के माध्यम से अनुसंधान कर्ता को दायित्व बोध कराया गया। गवाही के दौरान पूरी तरह तैयारी करके जबाव देने की जरुरत है । इसके लिए सभी अनुसंधान के दौरान सभी पहलुओं पर ध्यान रखें। घटना के बारे में चिकित्सक को भी पीड़िता से पूछताछ करने की जरुरत है ताकि सूचना एकत्रित करें जो न्यायोचित हो। पोक्सो के मामले में सीडब्लूसी की भूमिका अहम है। इस दिशा में विस्तृत जानकारी दी गई।
जिला जज प्रथम कुमार पवन ने कहा कि पोक्सो व किशोर न्याय में त्वरित न्याय दिलाने में पुलिस अधिकारियों की भूमिका अहम है। अनुसंधान के दौरान सभी पहलुओं पर ध्यान देकर आरोपित की गिरफ्तारी की जाती है। अनुसंधान के दौरान परेशानी होने पर न्यायिक पदाधिकारी, पीपी, एलएडीसी सहित इससे संबंधित अधिकारियों से जानकारी लेने में गुरेज नहीं करें। उन्होंने कहा कि पुलिस पदाधिकारी अनुसंधान में होने वाली समस्याओं को कार्यशाला के सामने रखें और अपनी समस्याओं का निष्पादन कराने का प्रयास करें।
सदर एसडीओ बैद्यनाथ उरांव ने पोक्सो की प्रक़ृति पर विस्तृत प्रकाश डाला। विधि सह परवीक्षा पदाधिकारी राजेश गुप्ता ने कहा कि इसमें तीन प्रकार से विचारण की प्रक्रिया है। सात साल से नीचे की सजा वाले व इससे उपर की सजा वाले के लिए अलग प्रक्रिया है। 16 से 18 आयु वर्ग के किशोर का विचारण चाइल्ड होम के माध्यम से होता है। गंभीर अपराध वाले बाल अपराधी प्राकृतिक मृत्यु तक की सजा व फांसी नहीं दी जा सकती है। इस अवसर पर बाल कल्याण समिति व पुलिस पदाधिकारियों की ओर से अपनी समस्याओं से भी पदाधिकारियों को अवगत कराया गया। मौके पर सभी सभी थाना के निरीक्षक, प्रभारी, आईओ, चिकित्सा पदाधिकारी, एलएडीसी, मध्यस्थ, बाल कल्याण समिति, बाल संरक्षण इकाई, विधि सह प्रतिरक्षण पदाधिकारी, समाज कल्याण विभाग के पदाधिकारी व कर्मी, पीएलवी आदि मुख्य रुप से उपस्थित थे।




