गोड्डा
वीआईपी कॉलोनी की दुर्दशा मरीजों को खाट पर ले जाने को मजबूर मुहल्ला वासी

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
गोड्डा : शहर की वीआईपी कॉलोनी का हाल आज किसी पिछड़े गांव से कम नहीं दिखता। एक ओर जहां जिला मुख्यालय के नाम पर गोड्डा तेजी से शहरी विकास का दावा करता है, वहीं दूसरी ओर इसी नगर क्षेत्र की वीआईपी कॉलोनी के लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। दिलचस्प बात तो यह है कि इसी मुख्य सड़क पर डीसी आवास,एसपी आवास, डीडीसी आवास,जज आवास हैं लेकिन किसी का ध्यान इस कॉलोनी पर नहीं है। हालात इतने बदतर हैं कि गंभीर रूप से बीमार मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए परिजनों को खाट का सहारा लेना पड़ रहा है, क्योंकि सड़कें पूरी तरह से जर्जर हो चुकी हैं और एंबुलेंस वहां तक पहुंच नहीं पाती। स्थानीय नगर वासी रंजीत कुमार ने बताया कि “यह स्थिति कोई नई नहीं है। 2011 से हम इसी हाल में जी रहे हैं। कॉलोनी की सड़कें पूरी तरह टूटी हुई हैं, हर बारिश के मौसम में रास्ते कीचड़ और गड्ढों से भर जाते हैं। नगर परिषद से लेकर विधायक और मंत्री तक को कई बार लिखित आवेदन दिया गया है, लेकिन आज तक किसी ने सुध नहीं ली। इसी मोहल्ले के निवासी धनंजय शर्मा ने नाराजगी जताते हुए कहा, “हम सबने मिलकर कई बार जनप्रतिनिधियों को आवेदन सौंपे, ज्ञापन दिए, लेकिन हमारी बात सिर्फ फाइलों तक ही सिमट कर रह गई है। अब तो हाल यह हो गया है कि स्कूल जाने वाले बच्चों की स्कूटी तक इस रास्ते पर फिसल कर गिर जाती है, टोटो पलटने की घटनाएं आम हो गई हैं। चंदा कुमारी, जिनका एक परिजन बीमार है, उन्होंने कहा, “हमारा मरीज घर में तड़प रहा था, लेकिन एंबुलेंस ड्राइवर आने से मना कर देता है। कहता है कि सड़क इतनी खराब है कि वाहन अंदर जा ही नहीं सकता। मजबूरी में खाट के सहारे उसे मुख्य सड़क तक लाना पड़ा। अब हम बार-बार यही मांग कर रहे हैं कि जनप्रतिनिधि सिर्फ चुनाव के समय नहीं, बल्कि संकट के समय भी हमारी सुध लें और जल्द से जल्द इस कॉलोनी की सड़कें बनवाई जाएं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि गोड्डा नगर परिषद और प्रशासन को बार-बार ध्यान दिलाए जाने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। यह स्थिति केवल विकास कार्यों की लचर व्यवस्था ही नहीं, बल्कि आम जनता के प्रति सरकारी तंत्र की उदासीनता को भी उजागर करती है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि इस पर नगर परिषद व स्थानीय विधायक मंत्री क्या संज्ञान लेती है




