बरेली
एसआरएमएस रिद्धिमा में मुशायरे की शाम बज्म ए सुखन का आयोजन
रिश्ते कायम हैं आज दौलत पर, मैं जाने किस गुमान पर हूं.
उभरते शायरों ने इश्क-मुहब्बत के साथ मानवीय पहलुओं पर पढ़े अपने कलाम.
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बरेली। श्रीराम मूर्ति स्मारक रिद्धिमा में मुशायरे की शाम बज्म ए सुखन का आयोजन हुआ। इसमें बरेली, बदायूं, दिल्ली और आसपास के शायरों ने अपने कलाम से इश्क और मुहब्बत का तो जिक्र किया ही, अपने शेर में मां-बाप की व्यथा के साथ ही सामाजिक व्यवस्था को भी उजागर किया। मुशायरे का आगाज बरेली के शायर सलमान आरिफ़ ने अपने कलाम ‘या ख़ुदा, कैसे इम्तिहान में हूं,’ से किया। श्रोताओं ने तालियां बजा कर उनकी हौसला अफजाही की। इसके बाद मंच संभाला बदायूं के शायर ज़ुबैर मिर्जा ने उन्होंने ‘जान कहते हैं तुमको तुम्हारे बिना, बरेली निवासी अभिषेक अग्निहोत्री ने अपने कलाम में सामाजिक व्यवस्था पर चोट किया। दिल्ली की शायरा मुस्कान मजीद ने अपने कलाम में मां-बाप का जिक्र किया। उन्होंने सुनाया ‘टुकड़ा जिगर का दे दिया मां- बाप ने, मगर बारात कह रही है खाना पसंद नहीं है। बरेली के शायर बिलाल राज बरेलवी ने कलाम पढ़ा- ‘उसके नजदीक मेरा प्यार वफा कुछ भी नहीं । मुशायरे की शाम बज्म ए सुखन का संचालन अश्वनी चौहान ने किया। इस मौके पर एसआरएमएस ट्रस्ट के संस्थापक व चेयरमैन देव मूर्ति जी, आशा मूर्ति जी, ऋचा मूर्ति जी, गुरु मेहरोत्रा, सुभाष मेहरा, डा. एमएस बुटोला, डा.प्रभाकर गुप्ता, डा. अनुज कुमार, डा.शैलेश सक्सेना, डा.मनोज टांगड़ी, डा. रीटा शर्मा सहित शहर के गणमान्य लोग मौजूद रहे ।



