ललितपुर
मशहूर शायर राहत इंदौरी को दी गयी श्रद्धांजलि
बुन्देलखण्ड मीडिया पत्रकार क्लब ने किया कौमी एकता मुशायरा व कवि सम्मेलन
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
अपना जमीन आस्मां हिन्दोस्तान : जहीर ललितपुरी
ललितपुर। मशहूर शायर मरहूम राहत इंदौरी की याद में बुन्देलखण्ड मीडिया पत्रकार क्लब व गुलिस्तान-ए-अदब द्वारा एक कौमी एकता मुशायरा व कवि सम्मेलन का प्रोग्राम कैप्टन अशोक श्रीवास्तव की जेरे परस्ती में आयोजित किया गया। बुन्देलखण्ड मीडिया पत्रकार क्लब के संरक्षक व इंसाफ का बाण अखबार के संपादक जाकिर राज चौहान के पनारी स्थित निवास पर आयोजित कार्यक्रम में ललितपुर शहर के बुद्धिजीवी नागरिकों ने राहत इन्दौरी की जिंदगी व शायरी पर अपने विचार कर खिराज-ए-अकीदत पेश की। इस मौके पर जाकिर राज चौहान ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम भाईचारा की भावना पैदा करते हैं। लोगों को एकजुट रहना सिखाते हैं। इससे लोगों के दिलों में एकता बनी रहती है।
इस कार्यक्रम की सदारत मशहूर व मारूफ शायर असर ललितपुरी ने व निजामत जहीर ललितपुरी ने की। इस गंगा जमुनी प्रोग्राम की शुरुआत वकील खां ने नाते पाक से की इसके बाद पंकज अंगार ने सरस्वती वन्दना व णमोकार मंत्र का पाठ किया। जहीर ललितपुरी ने गुरुनानक का शेर अव्वल अल्लाह नूर उपाया कुदरत के सब बन्दे, एक नूर से जग उपजाया कौन भले को मन्दे भावार्थ सहित सुनाया और असर ललितपुरी ने अपना मशहूर जमाना गीत फूलों का गुलदस्ता प्यारा हिन्दोस्तान हमारा है सुनाया। मशहूर शायर सदाकत खां सदाकत ने अपनी गजल पेश यूं मुहब्बत के गुल खिलाना है, जिन्दगी खुशनुमा बनाना है, मैं सदाकत की लाज की रख लूंगा, इससे रिश्ता मेरा पुराना है की। इसे बहुत सराहा गया। पंकज अंगार ने कहा कि सारे जग में बना तिरंगा भारत की पहचान, तीन रंगों ने जोड़ रखा है सारा हिन्दुस्तान। इसके बाद के. के. पाठक ने अपनी बुन्देली रचना मोखों तनकई नई गंदेले अपनी अपनी पेले रचना सुनायी। संचालन करते हुए जहीर ललितपुरी ने अपनी गजल अपना जमीन आस्मां हिन्दोस्तान है, लख्ते जिगर और जाने जां हिन्दोस्तान है सुनाई, जिसके श्रोताओं द्वारा बहुत पसंद किया गया। पत्रकार एम.आर. खान ने रेजा रेजा बिखर गया हूं मैं, अपने साये से डर गया हूं मैं बहुत पसन्द किया गया। वरिष्ठ शायर असर ललितपुरी ने मरहूम राहत इन्दौरी की शान में यह शेर पढ़ा कि उर्दू की सल्तनत के शहंशाह थे राहत, यानि कि हर इक शख्स की चाह थे राहत सुनाई जिसे बहुत ही सराहा गया। कार्यक्रम के वरिष्ठ संरक्षक कैप्टन अशोक श्रीवास्तव ने कहा कि शायरों और कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से अपने मुल्क की संस्कृति से रूबरू कराकर एक आदर्श प्रस्तुत किया। मुख्य अतिथि अजय श्रीवास्तव ने कहा कि ऐसे कौमी एकता के कार्यक्रम आयोजित किए जाये जिससे लोगों में एकता की भावना जागृत रहे। नेमवि के असि. प्रो. हिन्दी हिमांश धर द्विवेदी ने शायर मीर, फिराक गोरखपुरी के शेर प्रस्तुत किये। नेमवि के असि. प्रो. समाजशास्त्र डा. सुभाष जैन ने कहा कि इस तरह के आयोजन देश की एकता एवं सामाजिक सौहार्द की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। कार्यक्रम में शायर अख्तर जलील, जुबैद मंसूरी, अनवर अंसारी, शब्बीर खां मंसूरी, जावेद किरमानी, ताहिर अली, शमीम खां, जावेद अहमद, फीरोज खां, आसिफ खान मिच्चू, कुलभूषण नामदेव सिंटू, भगवान सिंह यादव, राशिद खान पप्पू, आशीष साहू, रज्जब अली खादिम, मुहम्मद इलियास, असलम खां, फेजल पठान, नाजिर बेग, फहीम बख्श, शमीम खान, वकील खान, आमिर खान, सूर्य प्रताप सिंह, शिशुपाल, राजाराम यादव, कलीम खान, परशुराम झा, आमिल व कामिल, अनवार खान पूर्व पाषर्द, केहर सिंह बुन्देला, आदि अनेक लोग उपस्थित रहे। अंत में बुन्देलखण्ड मीडिया पत्रकार क्लब के संरक्षक जाकिर राज चौहान ने सभी का आभार जताया।



