खैरथल

किशनगढ़ बास विधायक दीपचंद खैरिया ने सीएम को भेजा पत्र, 

खैरथल-तिजारा का नाम बदलने का किया विरोध: जिले का विकास रोकने का लगाया आरोप

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
खैरथल: किशनगढ़ बास विधायक दीपचन्द खैरिया ने सीएम भजनलाल शर्मा को पत्र  लिखकर खैरथल-तिजारा का नाम भृत्हरी नगर के प्रस्ताव को स्वीकृति देन पर विरोध जताया है और खैरथल -तिजारा का विकास रोकने का आरोप लगाया है विधायक के निजी सहायक सुनील काँन्त गोल्डी ने बताया की उपर्युक्त विषय में आग्रह किया गया है कि समाचार पत्रों एवं माननीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भारत सरकार व सांसद  अलवर के ट्विट से जानकारी प्राप्त हुई है कि आपके द्वारा खैरथल-तिजारा जिले का नाम परिवर्तन कर भर्तृहरि नगर करने का निर्णय लिया गया है | मैं  आपको अवगत करना चाहता हूँ कि  इस निर्णय से  आमजन में अत्यधिक आक्रोश है और ये कदम जनहित में बिलकुल भी नहीं है |  जहाँ तक राजर्षि भर्तृहरि की बात है वो तो अलवर ही नहीं अपितु समस्त भारतीयों के लिए श्रद्धा और सम्मान के योग्य हैं | अलवर में राज्य सरकार ने भर्तृहरि पैनोरमा बनाकर एतिहासिक और धार्मिक पर्यटन का केंद्र बनाया है | महाराज भर्तृहरि का स्थल थानागाजी के पास सरिस्का में है जहाँ लाखों श्रद्धालु आते हैं , जिसका मार्ग बेहद क्षतिग्रस्त है और धार्मिक पर्यटन को बढाने के लिए वहां विकास कार्यों की अत्यंत आवश्यकता है  | सरकार से गुजारिश  है कि उनके स्थल तक पहुँचने के लिए विशेष कोरिडोर का निर्माण करवाया जाये जिससे उनके भक्तों और पर्यटकों को सुविधा मिलेगी साथ ही  धार्मिक पर्यटन के नक़्शे पर श्री भर्तृहरि को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलेगी | तथा भर्तृहरि के नाम पर यदि किसी जिले का नामकरण किया जाना आवश्यक है तो इसके लिए उज्जैन जहाँ के राजा रहे या अलवर की जहाँ तपस्या की, वो सबसे उपयुक्त है खैरथल-तिजारा  को नाम परिवर्तन नहीं विकास की आवश्यकता है , आपकी सरकार ने अभी तक कोई विकास कार्य खैरथल में नहीं कराये हैं , खैरथल का विकास गुरुग्राम की तर्ज पर करने की आपकी घोषणा नाम परिवर्तन और मुख्यालय हटाने  के षड्यंत्र के रूप में सामने आई है | नए कार्य करना तो दूर जो पहले से हो रहा था उन कार्यों को भी रोक दिया गया है | खैरथल की जनता की बाईपास पर ओवरब्रिज निर्माण की मांग पूर्व सरकार ने 50 करोड़  की स्वीकृति के साथ की थी जिसके टेंडर को एक साल से जानबूझकर रोका हुआ है | जिला चिकित्सालय के आदेश हवा में हैं और पूर्व में स्वीकृत सेटेलाइट अस्पताल के बजट का उपयोग भी नहीं किया जा रहा है | अभी तक जिला कार्यालयों के लिए खैरथल में भूमि आवंटन और निर्माण कार्य शुरू नहीं करना सरकार की मंशा पर सवाल तो उठाते हैं | किशनगढ़ बास में युवाओं के लिए मेजर ध्यानचंद स्टेडियम के लिए भूमि आवंटन और बजट पूर्व सरकार द्वारा किया गया था जो अब मनमाने ढंग से रोका हुआ है | सरकार के विभिन्न कार्यक्रमों के आयोजन हेतु खैरथल में ऑडिटोरियम या बड़े सभा भवन का प्रस्ताव नगर परिषद् और सरकार को मेरे द्वारा प्रेषित किया गया है जिस पर भी कोई कार्यवाही नहीं है |
हमने यहाँ  अनेक स्कूल , कोलेज एवं चिकित्सालय खोले , उनमे भवन बनाये लेकिन वर्तमान सरकार उनमें पूरा स्टाफ तक नहीं लगा पा रही है | खैरथल-तिजारा जिले को अच्छे शैक्षिक और चिकित्सा संस्थानों और युवाओं को रोजगार  तथा उद्यमियों को अच्छे माहौल ,सुविधाओं की आवश्यकता है ना कि नाम परिवर्तन के झमेले की |  प्रत्येक जिले में मेडिकल कोलेज खोलने का प्रावधान चिकित्सा नीति में है ,अतः खैरथल जिला मुख्यालय पर जिला अस्पताल के साथ मेडिकल कॉलेज खोला जाये | विद्यालयों , महाविद्यालयों में भवन एवं भौतिक- मानवीय  संसाधनों की अत्यधिक आवश्यकताएं है , जो सरकार की प्राथमिकताओं  में होना चाहिए |
 खैरथल मुख्यालय के 10-15 किमी की परिधि में चार तहसील मुख्यालय ( खैरथल.किशनगढ़ ,हरसोली , मुण्डावर ) आते हैं तथा खैरथल-किशनगढ़ जुड़वां शहर की तरह हैं | खैरथल-किशनगढ़ बास  में 700 बीघा से अधिक सरकारी भूमि के साथ , ओद्योगिक क्षेत्र , प्रसिद्ध कृषि उपज मंडी , रेलवे स्टेशन , एक्सप्रेस हाईवे की उपलब्धता है | जिससे  खैरथल को सर्वाधिक उपयुक्त स्थान है |
अतः जनहित में आग्रह है जिले के नाम परिवर्तन के निर्णय को निरस्त कर मुख्यालय  परिवर्तन के मामले में स्थिति को पूर्णतया स्पष्ट कर आमजन की शंका को दूर किया जाये व खैरथल में कार्यालयों के भू-आवंटन  के प्रेषित प्रस्तावों को स्वीकृत कर निर्माण कार्य प्रारम्भ कराये जाएँ |
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