
अमरोहा,नौगावां सादात। भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण की अष्टमी तिथि को हुआ था, भगवान कृष्ण का प्राकट्य मध्य रात्रि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसलिए हर साल इस तिथि पर धूमधूम से कन्हैया का जन्मोत्सव मनाय जाता है। जन्माष्टमी के मौके पर भगवान के अलग-अलग स्वरूपों जैसे शालिग्राम, लड्डू गोपाल और राधा-कृष्ण स्वरूप की विधिवत पूजा होती है नौगावां सादात तहसील क्षेत्र के ग्राम लकड़हैट में चामुंडा देवी मंदिर पर मंदिर को सजाकर मध्य रात्रि तक भजन कीर्तन किया गया। कथावाचक यशकृष्णाचार्य ने भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का वर्णन करते हुए बताया कंस की बहन देवकी का विवाह वासुदेव के साथ हुआ था। जब देवकी और वासुदेव अपनी नई गृहस्थी के लिए विदा होकर जा रहे थे, तब रथ पर बैठे हुए अचानक आकाशवाणी हुई कि देवकी की आठवीं संतान कंस के लिए काल होगी और उसे मार डालेगी।
जब देवकी की आठवीं संतान के गर्भ में भगवान कृष्ण आए, तब श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि थी और रोहिणी नक्षत्र था। भगवान विष्णु ने देवकी के गर्भ में प्रवेश किया और आधी रात को भगवान कृष्ण का जन्म हुआ।
वासुदेव ने भगवान कृष्ण को एक टोकरी में रखकर यमुना नदी पार की और गोकुल में नंद और यशोदा के घर पहुंचाया। वहां उन्होंने अपने पुत्र को भगवान कृष्ण के साथ बदल दिया।भगवान कृष्ण का पालन-पोषण नंद और यशोदा ने गोकुल में किया। बड़े होने पर कृष्ण ने कंस का वध किया और मथुरा के राजा के रूप में उग्रसेन को पुनः स्थापित किया।जन्माष्टमी की कथा भगवान कृष्ण के जन्म और उनके जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं को दर्शाती है। यह कथा हमें भगवान कृष्ण के जीवन और उनके आदर्शों के बारे में जानने का अवसर प्रदान करती है। भजन कीर्तन में श्रद्धालु भजनों पर झूमे इस मौके पर भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे । उधर तहसील क्षेत्र के अन्य गांवों में भव्य कार्यक्रम हुए देहरी खुर्रम , कुमखिया , डहकबाड़ा , मेहंदी माफी, रामपुर सफेद आदि गांवों में झांकीया दहीं हांडी और मंदिरों सजाया गया तथा भजन कीर्तन आदि कार्यक्रम हुए तथा चंद्रमा निकलने पर विधि विधान से पूजा की गई।


