राजस्थान

रीको व्यापारियों का आंदोलन 22वें दिन भी जारी, सुंदरकांड पाठ कर बजरंगबली से न्याय की अरदास

रॉयल्टी वृद्धि और ठेकेदारों की मनमानी के खिलाफ व्यापारी वर्ग का संघर्ष तेज, आंदोलन ने धार्मिक रूप लिया

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
भरतपुर। रीको क्षेत्र के व्यापारियों का आंदोलन लगातार 22 वें दिन भी जारी रहा। अनिश्चितकालीन धरने के 16 वें दिन व्यापारियों ने अनोखा तरीका अपनाते हुए सामूहिक रूप से सुंदरकांड का पाठ किया और बजरंगबली से न्याय की गुहार लगाई। व्यापारियों का कहना है कि वे पिछले कई दिनों से शासन-प्रशासन को बार-बार अपनी समस्याओं से अवगत करा रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। ऐसे में अब व्यापारी वर्ग ने धार्मिक आस्था का सहारा लेते हुए बजरंगबली से प्रार्थना की कि वे ही सरकार को सद्बुद्धि दें और इस संकट से राहत दिलाएँ।
सुंदरकांड पाठ के बीच उठी न्याय की पुकार– धरनास्थल पर सुबह से ही बड़ी संख्या में व्यापारी, किसान और मजदूर एकत्रित हुए। सभी व्यापारियों ने सामूहिक रूप से सुंदरकांड का पाठ करते हुए अपने आंदोलन को धार्मिक स्वरूप दिया। इस अवसर पर व्यापारियों ने कहा कि जब सरकार और प्रशासन आमजन की पीड़ा नहीं सुन रहा है, तो अब उन्हें भगवान का ही दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है।
व्यापारियों का कहना है कि 33.33 प्रतिशत रॉयल्टी वृद्धि और ठेकेदारों की अवैध वसूली ने पूरे व्यापार को ठप करने की स्थिति ला दी है। निर्माण कार्य रुकने से हजारों मजदूर बेरोजगारी की कगार पर पहुँच चुके हैं। कई परिवार रोज़ी-रोटी के संकट से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुंदरकांड पाठ के माध्यम से वे बजरंगबली से यही प्रार्थना कर रहे हैं कि सरकार उनकी आवाज़ सुने और व्यापार बचाने के लिए उचित कदम उठाए।
आंदोलन की मुख्य वजह– गौरतलब है कि सैण्ड स्टोन और मैशनरी स्टोन पर सरकार ने हाल ही में 33.33 प्रतिशत रॉयल्टी बढ़ा दी थी।व्यापारियों का आरोप है कि इससे न केवल मकान निर्माण महंगा हुआ है, बल्कि किसान और मजदूर वर्ग भी प्रभावित हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षों की बचत से मकान बनाने वाले लोग अब महंगे पत्थरों की वजह से परेशान हैं। इसके अलावा, ठेकेदार विभागीय दरों की बजाय अलग-अलग दरों से वसूली कर रहे हैं। खासकर बयाना, बंशीपहाड़पुर, रूपवास और रूंदावल क्षेत्रों में ठेकेदार मनमानी कर रहे हैं। व्यापारियों का आरोप है कि यह खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाना है।
शासन-प्रशासन पर नाराजगी– धरने में मौजूद व्यापारी नेताओं ने कहा कि वे पिछले कई दिनों से जिला प्रशासन, राज्य सरकार और संबंधित विभागों से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। कई बार ज्ञापन देने और नेताओं से मुलाकात करने के बावजूद केवल आश्वासन ही मिले हैं।
व्यापारी नरेश सिंघल व प्रदीप झालानी ने कहा, “हमारी बात बार-बार सरकार तक पहुँचाई जा रही है, लेकिन आज तक ठोस कदम नहीं उठाया गया। व्यापार पूरी तरह से ठप होने की कगार पर है। मजदूर भूखमरी झेलने को मजबूर हैं। यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और उग्र होगा।”
आंदोलन को मिल रहा व्यापक समर्थन– धरने के दौरान व्यापारी संगठनों के अलावा स्थानीय परचून संघ और अन्य व्यापारिक वर्ग भी समर्थन देने पहुँचे। अब आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन मिलने लगा है। किसान संगठनों और मज़दूर संगठनों ने भी इस आंदोलन में शामिल होने का संकेत दिया है। व्यापारियों का कहना है कि यदि सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया तो पूरा व्यापारी वर्ग संयुक्त आंदोलन के लिए बाध्य होगा।
“सरकार चुप, अब भगवान से आस”– धरनास्थल पर मौजूद व्यापारियों ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जनता को अपनी समस्या बताने के लिए सड़क पर उतरना पड़ रहा है और सरकार चुप है। उन्होंने कहा, “आज हम सुंदरकांड का पाठ कर बजरंगबली से प्रार्थना कर रहे हैं कि वे ही हमारी सुनवाई कराएँ। जब इंसानी सरकार सुनवाई नहीं करती तो भगवान ही अंतिम सहारा होते हैं।”
परिवारों पर संकट– धरने में शामिल मजदूर वर्ग ने कहा कि रोज़ी-रोटी का संकट गहराता जा रहा है। मजदूरों का कहना है कि पत्थर की खदानों और मशीनरी यूनिट बंद हो रही हैं, जिससे हजारों लोग बेरोजगारी की ओर धकेले जा रहे हैं। एक मजदूर ने कहा, “हम सरकार से काम नहीं, सिर्फ हक मांग रहे हैं। यदि यही हाल रहा तो परिवार भूखा मर जाएगा।”
समाधान की उम्मीद– धरने में शामिल कई व्यापारियों ने कहा कि अब वे सरकार से तुरंत रॉयल्टी वृद्धि वापस लेने और ठेकेदारों की मनमानी रोकने की मांग करते हैं। उनका कहना है कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो आंदोलन प्रदेश स्तर पर फैल जाएगा और सरकार के लिए संभालना मुश्किल हो जाएगा।
 रीको व्यापारियों का यह आंदोलन अब केवल व्यापार तक सीमित नहीं रह गया है। बल्कि आमजन और धार्मिक आस्था से भी जुड़ गया है। सुंदरकांड पाठ के जरिए व्यापारियों ने संदेश दिया है कि अब वे न्याय के लिए ईश्वर की शरण में हैं। आंदोलन के 22वें दिन और अनिश्चितकालीन धरने के 16वें दिन भी उनका जज्बा कायम है। अब देखना होगा कि सरकार कब तक चुप रहती है और व्यापारियों की मांगों पर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
इस दौरान रामकिशोर पटेल ,माधो पटेल, प्रदीप झालानी, नरेश सिंघल, विष्णु सिंघल, राकेश खटीक, खुशीराम बंगसपुरा, भागसिंह, पदम बैंसला, गोविन्द शर्मा,महेश पटेल, लांगुरिया धाकड़ सहित कई व्यापारी मौजूद रहे।
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button