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उदयगिरि-हिमगिरि: नौसेना में शामिल हुए दो नए युद्धपोत

इनमें लगे हैं ब्रह्मोस-टॉरपीडो, जानें ये कितने घातक

 

नई दिल्ली। भारत में युद्धपोत- आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस हिमगिरि को नौसेना में शामिल किए जाने का यह कार्यक्रम इतना खास क्यों रहा? दोनों युद्धपोत के निर्माण को नौसेना के लिए आत्मनिर्भरता का प्रतीक क्यों कहा जा रहा है? यह दोनों पोत जिस नीलगिरि क्लास में आते हैं, वह आखिर क्या है? साथ ही इनकी खासियत क्या है? आइये जानते हैं…

भारतीय नौसेना में मंगलवार को दो नए युद्धपोतों को एक साथ सेवा में शामिल कर लिया। नीलगिरि क्लास के स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट- आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस हिमगिरि को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में एक कार्यक्रम के दौरान नौसेना को सौंपा। इन जबरदस्त तेज और आधुनिक फ्रिगेट्स को दो अलग-अलग शिपयार्ड कंपनियों की तरफ से बनाया गया है। इसके बावजूद इनकी खूबियों में ज्यादा अंतर नहीं है।

ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर भारत में युद्धपोत- आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस हिमगिरि को नौसेना में शामिल किए जाने का यह कार्यक्रम इतना खास क्यों रहा? दोनों युद्धपोत के निर्माण को नौसेना के लिए आत्मनिर्भरता का प्रतीक क्यों कहा जा रहा है? यह दोनों पोत जिस नीलगिरि क्लास में आते हैं, वह आखिर क्या है? साथ ही इनकी खासियत क्या है? आइये जानते हैं…

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, दोनों ही पोतों के निर्माण में स्वदेशी तकनीक और उद्योग का बड़ा योगदान रहा। इन्हें बनाने में 200 से ज्यादा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग जुड़े रहे, जिनसे 4000 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला, साथ ही 10 हजार अप्रत्यक्ष रोजगार भी पैदा हुए।

क्यों दोनों युद्धपोत को कहा जा रहा नौसेना की आत्मनिर्भरता का प्रतीक?

आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस हिमगिरि के निर्माण और इसे नौसेना में शामिल किए जाने को देश के रक्षा ईको सिस्टम के लिए आत्मनिर्भरता की ओर कदम बताया जा रहा है। दरअसल, 2025 में ही नौसेना में कई स्वदेश निर्मित प्लेटफॉर्म्स को शामिल किया जा चुका है। इनमें विध्वसंक पोत आईएनएस सूरत, युद्धपोत आईएनएस नीलगिरि और सबमरीन आईएनएस वागशीर शामिल हैं। इन सभी का निर्माण मझगांव डॉक लिमिटेड में हुआ था। इन्हें जनवरी में नौसेना में शामिल किया गया। इसके अलावा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर, कम पानी में संचालित होने वाले पोत- आईएनएस अरनाला और खासतौर पर गोताखोरी के लिए तैयार पोत- आईएनएस निस्तार को भी नौसेना में शामिल किया जा चुका है। इन सभी का निर्माण स्वदेशी स्तर पर हुआ है और इनमें लगे 75 फीसदी उपकरण और प्रणाली भारतीय कंपनियों की तरफ से ही बनाईं गई हैं।

क्या है नीलगिरि क्लास, जिसे नौसेना के लिए बताया जाता है गेमचेंजर?

भारत में नीलगिरि-क्लास की स्टेल्थ फ्रिगेट्स को कोड के तौर पर प्रोजेक्ट 17-एल्फा (प्रोजेक्ट-17ए) का नाम भी दिया गया है। यानी यह नौसेना के प्रोजेक्ट-17 फ्रिगेट यानी शिवालिक क्लास के अगले चरण के तौर पर देखा जाता है। शिवालिक क्लास के युद्धपोत अभी भी नौसेना में सक्रिया भूमिका में हैं। हालांकि, आईएनएस नीलगिरि तेजी से नौसेना में अपनी भूमिका बढ़ा रही हैं। प्रोजेक्ट 17ए के तहत इस साल जनवरी में आईएनएस नीलगिरि नाम के युद्धपोत को नौसेना में शामिल किया गया। इस प्रोजेक्ट में कुल सात युद्धपोत का निर्माण होना है और आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस हिमगिरि उसका ही हिस्सा हैं।

नीलगिरि श्रेणी के युद्धपोत प्रोजेक्ट के तहत सात में से चार पोत- नीलगिरि, उदयगिरि, तारागिरी और महेंद्रगिरी का निर्माण मझगांव डॉक लिमिटेड की ओर से किया जाना तय हुआ। दूसरी तरफ तीन का निर्माण- हिमगिरि, दुनागिरी और विंध्यगिरी का निर्माण गार्डन रीच शिप बिल्डर्स एंड इंजीनियर्स की तरफ से होने पर मुहर लगी। इनके निर्माण की तकनीक में भी बदलाव किया गया, ताकि इन्हें जल्द से जल्द नौसेना को सौंपा जा सके।

क्या है नौसेना में शामिल होने वाले दोनों युद्धपोत की खासियत?

नौसेना में नीलगिरि श्रेणी के युद्धपोत को भारत के तटीय इलाकों से दूर गहरे समुद्र में अभियान चलाने के मकसद से तैयार किया गया है। दोनों ही युद्धपोत किसी भी तरह के पारंपरिक और गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में सक्षम हैं। उदयगिरि और हिमगिरि, प्रोजेक्ट 17 (शिवालिक ) श्रेणी के युद्धपोत के अनुवर्ती जहाज हैं। इन दोनों जहाजों में डिजाइन, स्टेल्थ, हथियार और सेंसर प्रणालियों में महत्वपूर्ण सुधार शामिल हैं।

आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस हिमगिरि में नौसेना की तरफ से कई तरह के हथियार और प्रणालियों को लगाया गया है, ताकि यह जमीन से किए जाने वाले हमलों, हवाई हमलों और समुद्र के भीतर से मिलने वाली सभी चुनौतियों से निपट सकें।

ये पोत हेलिकॉप्टर आॅपरेशन के लिए सी किंग हेलिकॉप्टर ले जा सकते हैं, जो पनडुब्बी और सतही जहाजों को खोजने-मारने में सक्षम हैं। ये पोत ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल से लैस हैं। जो समुद्र और जमीन दोनों लक्ष्यों पर 290+ किमी की दूरी से हमला करने में सक्षम हैं। अंतिम चरण में आने वाली मिसाइलों और ड्रोन को मार गिराने की क्षमता, सोनार सिस्टम से लैस है, गहरे पानी में पनडुब्बी का पता लगाने में भी सक्षम है। ये पोत अरब सागर में पाकिस्तान की नौसैनिक गतिविधियों और ग्वादर पोर्ट पर चीनी मौजूदगी की निगरानी, बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर में चीनी युद्धपोतों व पनडुब्बियों पर हर पल नजर रखेंगे।

आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस हिमगिरि, ये नाम कहां से आए?

जहां प्रोजेक्ट-17ए के पहले पोत- आईएनएस नीलगिरि का नाम नीलगिरि पर्वत शृंखला से आया। यह पर्वत तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल के हिस्से में आते हैं। इसी तरह आईएनएस उदयगिरि का नाम आंध्र प्रदेश में स्थित उदयगिरि पर्वत शृंखला से लिया गया है। दूसरी तरफ हिमगिरि नाम की कोई पर्वत शृंखला तो नहीं है, लेकिन इसे हिमालय की बफीर्ली पहाड़ियों के परिचायक के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।

नौसेना आईएनएस उदयगिरि को पूर्वी कमान बेड़े में शामिल करेगी, जिसे सूर्योदय (सनराइज) बेड़ा नाम दिया गया है। इसके अलावा आईएनएस हिमगिरि पश्चिमी नौसैन्य कमान के अंतर्गत होगी।

प्रोजेक्ट-17ए के तहत तीन फ्रिगेट्स के नौसेना में शामिल होने के बाद उम्मीद की जा रही है कि अगली चार फ्रिगेट्स को अगले डेढ़ से दो साल में नौसेना में कमीशन किया जाएगा। वहीं, इसके बाद भारतीय नौसेना प्रोजेक्ट-17बी के तहत अगली पीढ़ी की फ्रिगेट्स के निर्माण का कार्य शुरू कर देगी।

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