गोड्डा
करम परब की तैयारी में रमें ग्रामीण, बहनों ने मनाई संजत, कल रखेंगी उपवास

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
पथरगामा : पथरगामा प्रखंड अंतर्गत पीपरा पंचायत के होपनाटोला गांव में कुड़मि समुदाय की युवतियों एवं बहनों द्वारा आज पारंपरिक रूप से संजत मनाई गई। इस अवसर पर कुंवारी बहनों (करमैती) ने पवित्रता एवं परंपरा का पालन करते हुए विशेष अनुष्ठान किए। कल करम एकादशी के दिन उपवास रखकर करम परब मनाया जाएगा।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची के कुड़मालि विभाग में स्नातकोत्तर की छात्रा सोनी महतो ने बताया कि करम परब कुड़मि समुदाय का एक प्रमुख पर्व है, जो प्रकृति और कृषि से गहराई से जुड़ा हुआ है। झारखंड के अलावा बंगाल, उड़ीसा और असम में भी इसे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।उन्होंने बताया कि छह दिन पूर्व बहनों ने जावा डाली (जवारे) को लाकर उसे माँ के रूप में लालन-पालन शुरू किया। प्रतिदिन सुबह-शाम करम गीतों के साथ बेड़हा (पानी) देकर उसकी सेवा की जाती है। करमैती बहनें इस दौरान संयमित जीवनशैली अपनाती हैं और साधारण भोजन करती हैं।आज संजत के दिन घरों की सफाई कर बहनें पारंपरिक वेशभूषा में दहंगी लेकर नदी में स्नान करने गईं। वहां अपने पूर्वजों एवं देवी-देवताओं को दातून, खीरा, हल्दी व तेल अर्पित किया। आज आरवा चावल का भोजन करने के बाद, कल करम एकादशी को उपवास रखा जाएगा। रात में भाई करम डाली लेकर आएंगे, और पूजन के बाद बहनें फलाहार करेंगी।करम परब के अवसर पर बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और खुशहाल जीवन की कामना करती हैं। ‘देहो-देहो करम गोसाई, दिहा गो आशीष; भइया हमर जियतय लाखो बरिस’ जैसे पारंपरिक गीतों से माहौल भक्तिमय हो जाता है।
करम परब, प्रकृति की सृजन शक्ति को नमन करने का पर्व है, जिसमें जावा (अंकुरित अनाज) को माँ मानकर उसका पालन-पोषण किया जाता है।




