बागपत

कानून को विधि व्यवसाय नहीं, इंसाफ़ का रास्ता मानता हूँ” – अमित कश्यप, एडवोकेट (क्रिमिनल)

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बागपत की ज़िला अदालत में पिछले कुछ सालों में जिस नाम ने क़ानून की गलियारों में तेज़ी से अपनी पहचान बनाई है, वह है अमित कश्यप (एडवोकेट, क्रिमिनल लॉ)। महज़ पांच साल के छोटे से सफ़र में उन्होंने लगभग 200 मुकदमों में न केवल पैरवी की बल्कि अपने तर्क और ज्ञान से कई अहम फैसलों को प्रभावित किया।
नेशनल प्रेस टाइम्स ने उनसे विस्तार से बातचीत की।
प्रश्न 1: अमित जी, आप क्रिमिनल लॉ की ओर कैसे आकर्षित हुए?
उत्तर:
“कानून की पढ़ाई करते समय ही मुझे यह एहसास हुआ कि क्रिमिनल लॉ समाज की असली तस्वीर दिखाता है। अपराध, पीड़ा, इंसाफ़ – यही वो पहलू हैं जो सबसे संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण होते हैं। मैंने तय किया कि मैं इस दिशा में काम करूंगा, ताकि ज़रूरतमंदों को सही मार्गदर्शन मिल सके।”
प्रश्न 2: पांच साल में 200 मुकदमों का अनुभव, यह कैसे संभव हुआ?
उत्तर:
“असल में बागपत जैसे ज़िले में क्रिमिनल मामलों की संख्या काफी रहती है। शुरू से ही मैंने मेहनत और तैयारी को अपना हथियार बनाया। हर केस को ऐसे लिया मानो यह मेरी परीक्षा है। शायद इसी वजह से इतने मुकदमों में कामयाबी मिली। यह संख्या नहीं, बल्कि अनुभव और सीख मेरे लिए अहम है।”
प्रश्न 3: आपको अपने सफ़र में सबसे बड़ी चुनौती क्या लगी?
उत्तर:
“सबसे कठिन काम है – भरोसा जीतना। मुकदमे में फँसे व्यक्ति को केवल वकील नहीं चाहिए होता, उसे सहारा चाहिए। कई बार लोग टूटी उम्मीदों के साथ आते हैं। ऐसे में मुझे केवल तर्क नहीं, बल्कि हौसला भी देना पड़ता है। यही असली चुनौती और ज़िम्मेदारी है।”
प्रश्न 4: वकालत के दौरान आपका सबसे यादगार केस कौन सा रहा?
उत्तर:
“एक केस में एक गरीब परिवार का बेटा झूठे आरोपों में फँसाया गया था। सबूतों और गवाहियों की गहराई से पड़ताल करके हमने उसे बरी कराया। जब वह परिवार अदालत से बाहर निकलकर रोते हुए मेरे पाँव छूने लगा, तो वही मेरे जीवन का सबसे बड़ा सम्मान था।”
प्रश्न 5: युवा वकीलों के लिए आपका संदेश?
उत्तर:
“वकालत कोई नौकरी नहीं, यह सेवा है। मेहनत, ईमानदारी और धैर्य – यही तीन मंत्र हैं। अगर आप सिर्फ पैसे कमाने आए हैं तो यह पेशा आपके लिए नहीं है। यहाँ केवल वही टिकता है जो न्याय को प्राथमिकता देता है।”
प्रश्न 6: भविष्य की क्या योजनाएँ हैं?
उत्तर:
“अभी मेरा पूरा ध्यान क्रिमिनल लॉ पर है। आने वाले समय में मैं चाहता हूँ कि लोगों को कानूनी जागरूकता भी मिले। ग़रीब और वंचित वर्ग तक क़ानून की जटिलताओं का सरलीकरण कर आम जन तक पहुँचाना मेरी प्राथमिकता है।
अमित कश्यप आज बागपत की अदालतों में मेहनत, लगन और ईमानदारी की मिसाल हैं। उनकी सोच साफ़ है – कानून को व्यवसाय नहीं, इंसाफ़ का रास्ता बनाना है।
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