गोड्डा
कुड़मि समुदाय ने करम एकादशी व्रत पारंपरिक धूमधाम से मनाया

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
पथरगामा : – पथरगामा प्रखंड अंतर्गत परसपानी, गंगटाकला, पीपरा पंचायत समेत आस-पास के सभी गांवों में कुड़मि समुदाय द्वारा करम एकादशी व्रत श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। यह पर्व भाई-बहन के प्रेम और प्रकृति की उपासना का प्रतीक माना जाता है। कुड़मालि परंपराओं के साथ मनाया गया पर्व टोटेमिक कुड़मी विकास मोर्चा के जिलाध्यक्ष दिनेश कुमार महतो ने जानकारी दी कि यह प्रकृति पर्व विशेष रूप से होपना टोला में रात 8 बजे से कुड़मालि नेगाचारि के अनुसार मनाया गया। इस दौरान कुड़मि बहनों ने उपवास रखते हुए करम एकादशी व्रत किया और पारंपरिक झूमर गीतों के माध्यम से जावा डाली को नौ बार जागाया।
बहनों द्वारा गाए गए गीतों में श्रद्धा और भाई के प्रति प्रेम साफ़ झलकता है:
“देहो देहो करम गोसाई, देहो गो आशीष,
भैया हमार जियतय लाखो बरिस।”
पारंपरिक पूजन विधि
भाइयों द्वारा करम डाली काट कर लाया गया, जिसे रातभर पूजा गया। पूजा में धान का फूल, खीरा पत्ता, आरवा चावल, दुब घास, दूध, पानी, दीया-बाती, अगरबत्ती आदि शामिल थे। गुरुवार सुबह जावा और डाली का विसर्जन नदी में किया गया।
ढोल-मांदर की थाप पर नाचती रहीं बहनें
पर्व के दौरान आखड़ा में भाई ढोल, मांदर, नगाड़ा बजाते रहे और बहनें पारंपरिक गीतों पर थिरकती रहीं।
गीत की एक पंक्ति विशेष रूप से लोकप्रिय रही:
“जले लागल दियरा, चमके लागल बाती,
जलों रे दियरा आजू के राती।
आज रे करम गोसाई घारे दुआरी,
कायल रे करम गोसाई कास नदीक पार।”




