बाराबंकी
श्रीमद् भागवत कथा में पांडव जन्म एवं राजा परीक्षित की कथा का हुआ वर्णन

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बाराबंकी। ग्राम सिसवारा स्थित दिगंबरनाथ मंदिर पर चल रही 5 दिवसीय श्रीमद्भागवत अमृत वर्षा के दूसरे दिन कथावाचक रामहेत यादव रशिया ने पांडव जन्म एव राजा परीक्षित की कथा सुनाकर भक्तो को भक्ति मे सरोवर कर दिया।कथावाचक रामहेत यादव ने कहा कि पांडवों का जन्म कुंती और माद्री द्वारा देवताओं के आह्वान से हुआ, क्योंकि राजा पांडु को ऋषि किंदम ने ऐसा श्राप दिया था कि शारीरिक संबंध बनाने से उनकी मृत्यु हो जाती। कुंती के मंत्र से युधिष्ठिर का जन्म धर्म से, भीम का वायुदेव से, और अर्जुन का इंद्र से हुआ। माद्री ने अश्विनीकुमारों को बुलाकर नकुल और सहदेव को जन्म दिया। यह सब हस्तिनापुर में पांडु के घर हुआ इस प्रकार पांचों पांडवों का जन्म हुआ, और उन्हें कुरु वंश के पुत्रों के रूप में ही स्वीकार किया जाता था, जबकि वे वास्तव में विभिन्न देवताओं की संतानें थीं।कथावाचक ने राजा परीक्षित की कथा सुनाते कहा कि महाभारत युद्ध में कौरवों ने पांडवों के सारे पुत्रों का वध कर दिया था. तब उनका एकमात्र वंशधर अर्जुन के पुत्र अभिमन्यू की पत्नी उतरा के गर्भ में पल रहा था. पांडवों के पूरे वंश को खत्म करने के लिए कौरवों के साथी अश्वत्थामा ने उस गर्भस्थ बालक पर ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर दिया. तब भगवान श्रीकृष्ण ने उतरा के गर्भ में प्रवेश कर उस बालक की ब्रहस्त्र से रक्षा की. इस दौरान बालक दस महीनों तक अंगूठे के बराबर हुए भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन करता रहा. ब्रहस्त्र को विफल कर जन्म का समय आने पर भगवान वहां से अदृश्य हो गए. पर फिर भी ब्रहस्त्र का कुछ असर रहने पर वह बालक मृत समान पैदा हुआ. ये जानकार भगवान श्रीकृष्ण प्रसूतिका गृह में आए और उन्होंने उस शिशु को जीवित कर दिया. गर्भ में कठिन परीक्षा होने के कारण यही बालक परीक्षित के नाम से प्रसिद्ध हुए। इस मौक़े पर अध्यक्ष ओमकार यादव, रामलाल यादव,लल्लू वर्मा, गोकुल वर्मा, संदीप वर्मा, आकाश वर्मा, ओमप्रकाश यादव, भानुप्रताप रावत,प्रदीप कुमार, अमरेश् ,राकेश, अवधेश लाइन मैन आदि भक्त मौजूद रहे।



