फिल्म डायरेक्टर एवं लेखक संतराम बंजारा से बातचीत

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
प्रश्न 1 : संतराम जी, आप फिल्म इंडस्ट्री में एक बड़ा नाम हैं। आपकी जड़ें बागपत से जुड़ी हैं। शुरुआत कैसे हुई?
संतराम बंजारा : जी हाँ, मैं बागपत का रहने वाला हूं और यही मेरी असली पहचान है। बचपन से ही मुझे फिल्म और लेखन का शौक था। बागपत की मिट्टी ने मुझे मेहनत और संघर्ष करना सिखाया। छोटे मंचों से लेकर बड़े पर्दे तक का सफर आसान नहीं था, लेकिन मेरी लगन और बागपत की हिम्मत ने मुझे रास्ता दिखाया।
प्रश्न 2 : आपकी सबसे चर्चित फिल्म “ठलवा” रही है। इसके पीछे की कहानी क्या है?
संतराम बंजारा : ठलवा मेरे जीवन की अहम फिल्म रही। यह सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि बागपत की सोच और यहां के समाज से निकली कहानी थी। इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर धूम मचाई और दर्शकों के दिलों में जगह बनाई। इसने यह साबित किया कि बागपत की धरती भी ऐसे कलाकार और डायरेक्टर पैदा करती है जो पूरी इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना सकते हैं।
प्रश्न 3 : आपने सैकड़ों फिल्में बनाई हैं। क्या कोई खास थीम है जिस पर आप ज्यादा काम करना पसंद करते हैं?
संतराम बंजारा : मेरी कोशिश रहती है कि फिल्में समाज को आईना दिखाएं। चाहे कॉमेडी हो, सस्पेंस हो या सामाजिक संदेश—हर कहानी में मैं बागपत की झलक और यहां के लोगों की सोच को जरूर शामिल करता हूं।
प्रश्न 4 : फिल्म इंडस्ट्री में आने वाले नए कलाकारों को आप क्या संदेश देना चाहेंगे?
संतराम बंजारा : मेरा कहना है कि मेहनत और ईमानदारी ही सफलता की कुंजी है। बागपत के युवाओं में अपार टैलेंट है। अगर वह मेहनत करें तो बॉलीवुड और साउथ सिनेमा तक अपनी पहचान बना सकते हैं।
प्रश्न 5 : आने वाले समय में आपकी क्या योजनाएं हैं?
संतराम बंजारा : अभी कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। मैं चाहता हूं कि आने वाली फिल्मों में बागपत की संस्कृति और यहां के संघर्षशील समाज को भी बड़े पर्दे पर दिखाया जाए। इससे बागपत का नाम और ऊँचाई पर जाएगा।
बागपत की शान बने संतराम बंजारा
बागपत की धरती के लाल संतराम बंजारा आज फिल्म जगत में मेहनत और लगन का पर्याय बन चुके हैं। ठलवा जैसी सुपरहिट फिल्म से लेकर सैकड़ों कहानियों तक, उन्होंने साबित किया है कि बागपत सिर्फ किसान और संघर्ष की भूमि ही नहीं, बल्कि कला और सिनेमा का भी गढ़ है।



