अमेठी

गोवंश आश्रय स्थलों को तीन महीने से नहीं मिली भूसा खरीद की धनराशि

इलाज के अभाव में संरक्षित गोवंशों के मरने का क्रम जारी

गो आश्रय स्थलों के लिए ग्राम प्रधानों ने पूलिंग सिस्टम फिर से शुरू करने की मांग की

ग्राम प्रधानों ने दिया ज्ञापन

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो

 

अमेठी। जिले में संचालित गोवंश आश्रय स्थलों को भूसा खरीद की धनराशि तीन महीने से नहीं मिली है। पिछले साढ़े चार साल में अधिकारियों ने गो आश्रय स्थलों पर ग्राम प्रधान और गांव की जनता के साथ कोई बैठक नहीं की है। मंगलवार को ग्राम प्रधान संघ गौरीगंज के अध्यक्ष अश्विनी पांडेय की अगुवाई में ग्राम प्रधानों और प्रधान प्रतिनिधियों ने डी एम को ज्ञापन दिया।
पांच सूत्रीय ज्ञापन में कहा गया है कि कुछ कर्मचारियों की लापरवाही से गोवंशों के भरण पोषण के लिए शासन से मिलने वाली धनराशि समय से नहीं मिल पा रही है।
पूलिंग से भुगतान की व्यवस्था केवल अमेठी जिले में बंद की गई है, अन्य जिलों में नहीं।यह धनराशि दिलाई जाय।जिन ग्राम पंचायतों में गोशालाएं संचालित हैं, वहां मनरेगा के कार्यों के लिए 60और40के अनुपात में छूट दी जाय और मनरेगा से होने वाले मैटेरियल पेमेंट में इन ग्राम पंचायतों को वरीयता प्रदान की जाय।
ग्राम प्रधान गोकुल प्रसाद, पवन सिंह, अश्वनी पांडे, संतराम, रामकरण, अभिषेक सिंह, सरजू प्रसाद , जय सिंह, यदुनाथ, मनीष तिवारी, संतोष ,महजबी, रामकिशोर ,संजय सिंह ,जितेंद्र पाल ,रीता, इंद्रभान सिंह, बबलू यादव, राजकुमार, पवन कुमार, सौरभ यादव, किरन, राजेंद्र कुमार, पवन शुक्ला, रमेश चन्द्र गौड़, प्रधान प्रतिनिधि संजय सिंह, अमरनाथ, राजबहादुर, रमेश कुमार प्रजापति, मुख्तार अली आदि मौजूद रहे।

गोवंशो के इलाज की समुचित व्यवस्था नहीं

जिले में संचालित गोवंश आश्रय स्थलों पर पशुओं के इलाज की समुचित व्यवस्था नहीं है।इलाज के अभाव में हर महीने दर्जनों गोवंशो की मौत हो रही है।गोवंशो की मौत के बाद उनके पोस्ट मार्टम की कोई व्यवस्था नहीं है।जे सी बी से खुदाई करके आश्रय स्थलों के पास ही गोवंशो को जमीन में गाड़ दिया जाता है। वृहद गोवंश आश्रय स्थल सरैया दुबान में पिछले छः महीने के भीतर एक दर्जन से अधिक गोवंश मौत के शिकार हो चुके हैं। गोवंश आश्रय स्थल नुंवावा में भी यही स्थिति है। टीकरमाफी के पूर्व प्रधान प्रतिनिधि रवीन्द्र प्रताप सिंह ने गोवंशो की मौत के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किए हैं।उनका कहना है कि पिछले छः महीने के भीतर एक दर्जन से अधिक गोवंशों की मौत हो चुकी है। उनको ठीक से दफनाया भी नहीं गया। गोवंशों के कंकाल टीकरमाफी आश्रम के जंगल में पड़े हुए हैं।

जिलाधिकारी महोदय ने हमारी समस्याओं को गंभीरता से सुना है। अधिकारियों की बैठक बुलाकर एक सप्ताह के भीतर सारी समस्याओं के हल का भरोसा दिया है।
अश्विनी पांडेय
अध्यक्ष प्रधान संघ, गौरीगंज

गोशालाओं से सम्बंधित सभी भुगतान ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव के संयुक्त खाते में होते हैं। मांग पत्र बहुत पहले भेजा जा चुका है। गोवंश आश्रय स्थलों पर संरक्षित गोवंशों के इलाज के लिए पशु चिकित्सालयों को कोई अतिरिक्त फंड नहीं मिलता। जो दवाएं ओपीडी के लिए आती हैं,उसी से काम चल रहा है। विभाग में स्टाफ बहुत कम है, शासन से ही नियुक्तियां नहीं हो रही हैं।
डा शिव ओम गंगवार
उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, अमेठी, जनपद अमेठी

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