गाजियाबाद
भजनों जयकारों से महकी गलियां, नवरात्रि उत्सव बना अविस्मरणीय
कन्याओं की कमी से पूजा में रही जद्दोजहद
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
लोनी। नवरात्रि के पावन अवसर पर बुधवार को मां दुर्गा के अष्टमी स्वरूप मां महागौरी की आराधना पूरे क्षेत्र में हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ संपन्न हुई। दिनभर मंदिरों और घर-घर में भक्तों ने कंजक पूजन कर माता को प्रसन्न करने का प्रयास किया। भक्तों ने कन्याओं को हलवा, पूरी, चने और विविध व्यंजनों का भोग लगाकर आशीर्वाद प्राप्त किया। पूजा के बाद श्रद्धालुओं ने कन्याओं को भेंट स्वरूप उपहार देकर विदा किया, जिससे गली-मोहल्लों में रौनक छाई रही।
कंजक पूजन के साथ व्रत का पारण
जिन भक्तों ने अष्टमी तक व्रत रखा था, उन्होंने कंजक पूजन के साथ अपने व्रत का पारण किया। नन्ही कन्याओं और बालकों को माता का स्वरूप मानकर विशेष सम्मान दिया गया। कई स्थानों पर सामूहिक कंजक पूजन का आयोजन भी हुआ।
कन्याओं की कमी से भक्त परेशान
हालांकि, इस बार अष्टमी और नवमी दोनों ही तिथियों पर कंजकों की कमी देखने को मिली। श्रद्धालु पूजा के लिए कन्याओं की तलाश करते नजर आए। कई परिवारों ने कन्याओं को पहले ही आमंत्रित कर “एडवांस बुकिंग” कर ली थी। शास्त्रों के अनुसार, पांच, सात या नौ कन्याओं के साथ एक छोटे बालक को बैठाकर पूजा करना पूर्ण माना जाता है।
“कंजक बिना अधूरी है पूजा” – पं. विनय शास्त्री
गुलाब वाटिका कॉलोनी स्थित प्राचीन शिव मंदिर के पुजारी पं. विनय कुमार शास्त्री ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए बताया कि नौ दिनों का व्रत कंजक पूजन के बिना अधूरा माना जाता है। उन्होंने कहा कि भक्त यदि सच में माता का आशीर्वाद पाना चाहते हैं तो कंजकों को भरपेट भोजन कराएं और उनके स्वाद अनुसार मिठाई व बच्चों को प्रिय पकवान अवश्य शामिल करें। सभी पकवान सात्विक होने चाहिए, जिनमें प्याज और लहसुन का प्रयोग वर्जित है।
भक्ति और उत्साह से सराबोर क्षेत्र
अष्टमी के अवसर पर मां की जयकारों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान रहा। श्रद्धालुओं के चेहरों पर भक्ति और उल्लास की झलक साफ नजर आई। घर-घर से आती महाप्रसाद की सुगंध और मंदिरों में गूंजते भजनों ने नवरात्रि के इस पर्व को और भी पावन बना दिया


