गाजियाबाद

जनसुनवाई में जनता खामोश,अब अफसर परेशान

 डी एम ने दिखाई सख्ती— ‘शून्य फीडबैक बना भारी  35 विभागों के अफसरों का वेतन रोका गया

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 
गाजियाबाद : गाजियाबाद जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मंदार ने आईजीआरएस (जनसुनवाई) पोर्टल पर लगातार शून्य संतुष्ट फीडबैक पाने वाले 35 विभागों के अधिकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी ने इन सभी अधिकारियों के वेतन बिल पर तत्काल रोक लगाने के आदेश जारी कर दिए हैं।
 ‘शून्य फीडबैक’ से उजागर हुई अधिकारियों की बड़ी लापरवाही
सितंबर 2025 में आई जी आर एस पोर्टल पर होने वाली शिकायतों पर इन अधिकारियों को एक भी संतुष्ट फीडबैक प्राप्त नहीं हुआ।जिस कारण प्रशासनिक रिपोर्ट में इसे “गंभीर लापरवाही” माना गया।
जिलाधिकारी ने लापरवाह अधिकारियों को चेताया 
> “कुछ अधिकारियों की उदासीनता के कारण जनपद की छवि शासन के समक्ष धूमिल हो रही है। जब तक शिकायतो की जांच के फीडबैक में सुधार नहीं होगा, तब तक संबंधित अधिकारियों का वेतन जारी नहीं किया जाएगा।”
 अफसरों की ‘प्रशासनिक निरंतरता’ पर तंज
दिलचस्प बात यह है कि कुछ अधिकारियों ने इस स्थिति को “बेहतर समझ” करार दिया। एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा—
> “हमने जनता की शिकायतों को इतनी गंभीरता से नज़रअंदाज़ किया कि अब जनता ने भी हमें जवाब देना ज़रूरी नहीं समझा। इसे कहते हैं मौन सहमति।”
दूसरे अधिकारी ने व्यंग्य में कहा
> “रैंकिंग तो आती-जाती रहती है, मगर हमारी कार्यशैली स्थिर है। इसे कहते हैं प्रशासनिक निरंतरता।”
 जनता बोली — जब शिकायत का कोई जवाब नहीं, अधिकारी फीडबैक क्यों दें?
लोनी के निवासी पवन कुमार का कहना है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद महीनों तक कोई सुनवाई नहीं होती।
> “जब कार्रवाई ही नहीं होती तो फीडबैक देने का क्या मतलब? लोग अब इस सिस्टम से उम्मीद छोड़ चुके हैं।”
 डीएम ने दिया अधिकारियों को सख्त संदेश
मुख्य कोषाधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि जिन विभागों का फीडबैक शून्य है, उन अधिकारियों के वेतन बिल पर तत्काल रोक लगाई जाए। जिलाधिकारी ने साफ कहा कि जनहित से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
 जनता की मांग — सिस्टम नहीं, अधिकारियों की मानसिकता बदले
जनता का कहना है कि पोर्टल को अपडेट करने से कुछ नहीं होगा, जब तक अधिकारियों की कार्यशैली में बदलाव नहीं आता।
> “जब तक अफसरों के दिमाग का रीस्टार्ट बटन नहीं दबेगा, तब तक उनकी कार्यशैली में कोई सुधार संभव नहीं,” एक स्थानीय नागरिक ने कहा।
जिलाधिकारी गाजियाबाद रविन्द्र कुमार मंदार की
 यह कार्यवाही सरकार के जनसुनवाई पोर्टल की विश्वसनीयता और प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
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