गाजियाबाद
ब्लास्ट में घायल मजदूर की हालत गंभीर
महिलाओं ने जिलाधिकारी से दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
गाज़ियाबाद : थाना टीला मोड़ क्षेत्र के गगन विहार वार्ड-20 में सोमवार दोपहर एक अवैध पीतल ढलाई फैक्ट्री में भीषण माके में घाऊ मजदूर गंभीर रूप से झुलस गया, जिसे इलाज के लिए दिल्ली के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है
भट्टी में धमाका, धुएं का गुबार और फिर मची अफरातफरी
सूत्रों के अनुसार, डी-ब्लॉक मोहन हलवाई वाली गली के पास, गगन विहार में कुएं के बराबर से जाने वाली गली में स्थित फैक्ट्री में अचानक भट्टी फट गई। धमाका इतना तेज़ था कि आसपास के घरों की दीवारें तक हिल गईं और पूरे इलाके में धुआं फैल गया।
मौके पर मौजूद लोगों ने किसी तरह अन्य मजदूरों को फैक्ट्री से बाहर निकाला।
घायल मजदूर की पहचान हरिओम पुत्र लखमचंद के रूप में हुई है। ब्लास्ट के दौरान पिघली हुई पीतल की धातु हरिओम के गले में जा फंसी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। स्थानीय लोगों ने उसे तत्काल एक निजी अस्पताल पहुंचाया, जहां से उसे हालत नाजुक होने पर दिल्ली के कैलाश दीप हॉस्पिटल (कड़कड़डूमा) रेफर किया गया। सूत्रों के अनुसार उसका ऑपरेशन जारी है और स्थिति गंभीर बनी हुई है।
रिहायशी इलाके में अवैध फैक्ट्रियों का जाल और प्रशासन की चुप्पी
स्थानीय लोगों के अनुसार, जिस फैक्ट्री में ब्लास्ट हुआ वह जोगिंद्र नामक व्यक्ति की बताई जा रही है।
यह फैक्ट्री कई वर्षों से बिना किसी अनुमति के संचालित हो रही थी।
गगन विहार, हर्ष विहार और भोपुरा गांव के आसपास सैकड़ों की संख्या में अवैध पीतल ढलाई और जींस रंगाई की फैक्ट्रियां चल रही हैं — वह भी रिहायशी इलाकों में, जहाँ घनी आबादी और छोटे बच्चे रहते हैं।
इन फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं और जहरीली गैसें स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुकी हैं।
जनता की शिकायतें और विभाग की ‘नींद’
क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि वे कई बार जिलाधिकारी, नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड वसुंधरा के अधिकारियों को लिखित व मिलकर शिकायत कर चुके हैं। आरोप है कि
विशेष रूप से क्षेत्रीय अधिकारी और सर्किल इंचार्ज को बार-बार जानकारी दी गई,
लेकिन हर बार केवल केवल “जांच का आश्वासन” देकर मामले को ठंडे बस्ते में डालकर अधिकारियों ने अपने कर्तव्यों की इति श्री कर ली स्थानीय लोगों ने बताया कि पिछले महीने प्रदूषण विभाग की एक टीम ने दो फैक्ट्रियों को सील किया था,
लेकिन दो दिन बाद ही फैक्ट्री संचालकों की अधिकारियों से साठ गांठ के चलते सील तोड़कर उत्पादन दोबारा शुरू कर दिया गया।
स्थानीय लोगों के आरोप है कि, इन फैक्ट्रियों से हर महीने ‘शुल्क’ सम्बंधित अधिकारियों द्वारा शुल्क वसूला जाता है, जिससे अधिकारी इस और से आंख मूंदे बैठे हुए हैं
हादसे से पहले की तस्वीरें और प्रशासन की मौजूदगी
स्थानीय लोगों का आरोप है कि 11 सितंबर की शाम करीब 4 बजे प्रदूषण विभाग और अन्य अधिकारी उसी फैक्ट्री के पास ही मौजूद थे और उन्होंने फैक्ट्री मालिकों से मिलकर बातचीत भी की थी। इसके बावजूद फैक्ट्री के अंदर कोई निरीक्षण नहीं किया गया, न ही किसी सुरक्षा मानक का पालन करवाया गया।
इस हादसे ने विभागीय लापरवाही की पोल खोलकर रख दी है।
जनता में आक्रोश, जिम्मेदारी तय करने की मांग
घटना के बाद गगन विहार की महिलाएं जिलाधिकारी से मिलने पहुंचीं और
अवैध प्रदूषणकारी फैक्ट्रियों को बंद करने तथा दोषी अधिकारियों और मालिकों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की।


