
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
लखनऊ : बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने आज लखनऊ के माल एवेन्यू स्थित पार्टी के प्रदेश कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में पार्टी के संगठन को मजबूत करने और 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की रणनीति पर चर्चा हुई। बैठक में प्रदेश भर से वरिष्ठ नेता, जिला अध्यक्ष, समन्वयक और प्रमुख पदाधिकारी शामिल हुए। हालांकि, पार्टी के राष्ट्रीय समन्वयक और मायावती के भतीजे आकाश आनंद इस बैठक में शामिल नहीं हो सके, क्योंकि वे वर्तमान में बिहार के दौरे पर हैं।
बैठक का मुख्य एजेंडा
यह बैठक 9 अक्टूबर को कांशीराम की 19वीं पुण्यतिथि पर आयोजित ‘महासंकल्प रैली’ की सफलता के बाद बुलाई गई, जिसमें लाखों कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने पार्टी में नया जोश भरा। बैठक में निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया गया:
.संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करना: पार्टी ने बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने की योजना बनाई। कार्यकर्ताओं को स्थानीय स्तर पर जनसंपर्क बढ़ाने और मतदाता आधार को मजबूत करने के निर्देश दिए गए।
.सामाजिक इंजीनियरिंग: बसपा 2007 के अपने सफल ‘सर्वजन हिताय’ फॉर्मूले को पुनर्जनन की कोशिश कर रही है। इसके लिए भाईचारा कमेटियों के माध्यम से मुस्लिम, अति पिछड़े वर्ग (EBC), दलित और ब्राह्मण समुदायों को जोड़ने की रणनीति बनाई गई।
.आकाश आनंद की भूमिका: मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी का युवा चेहरा बनाने की दिशा में कदम उठाए हैं। आकाश पूरे उत्तर प्रदेश में जनसभाएं करेंगे और युवा मतदाताओं को आकर्षित करने पर ध्यान देंगे। मायावती ने कार्यकर्ताओं से आकाश को अधिक सम्मान देने का आह्वान किया।
.चुनावी रणनीति: बसपा ने स्पष्ट किया कि वह 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी। मायावती ने विपक्षी दलों पर ‘गुप्त गठबंधन’ का आरोप लगाते हुए कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने को कहा। बिहार विधानसभा चुनावों में भी पार्टी अपनी उपस्थिति मजबूत करने की योजना बना रही है।
आकाश आनंद की अनुपस्थिति
आकाश आनंद की अनुपस्थिति ने कुछ चर्चाओं को जन्म दिया, लेकिन पार्टी सूत्रों ने स्पष्ट किया कि वे बिहार में संगठन को मजबूत करने के लिए दौरा कर रहे हैं। मायावती ने हाल ही में आकाश को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था, जिसके बाद उनकी सक्रियता बढ़ी है। बिहार में उनकी गतिविधियां 2025 के विधानसभा चुनावों के लिए बसपा की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही हैं।
बसपा का पुनरुत्थान
9 अक्टूबर की रैली ने बसपा को नई ऊर्जा दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बसपा अपनी सामाजिक इंजीनियरिंग और संगठनात्मक रणनीति को प्रभावी ढंग से लागू कर पाई, तो 2027 में वह उत्तर प्रदेश में एक मजबूत विकल्प बन सकती है। मायावती ने कार्यकर्ताओं से पुराने नेताओं को वापस लाने और पार्टी को 2007 की तरह व्यापक जनाधार वाला बनाने का आह्वान किया।
पार्टी प्रवक्ता का बयान
बसपा के प्रवक्ता ने कहा, “मायावती जी के नेतृत्व में यह बैठक पार्टी के भविष्य की दिशा तय करने वाली है। आकाश आनंद का जोश और संगठन की एकजुटता बसपा को फिर से शिखर पर ले जाएगी।”




