
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
अमेठी। भागवत कथा मर्मज्ञ आचार्य डाॅ राम कृपाल त्रिपाठी ने कहा कि अंहकार मनुष्य को मार्ग से भटका देता है। इस नाते अंहकार नही करना चाहिए। बडे लोग अपना अपराध छोटे के ऊपर डालते है। बडे चाकित होकर वरूण लोक का दर्शन किया। भगवान श्रीकृष्ण के बारे मे नन्द बाबा को जानकारी हो गई है। कि भगवान श्रीकृष्ण है। हमारी विद्या दिव्य ज्ञान है। जब सुख के बारे भगवान से कहते है। कुत्ता का जन्म पा कर सुख भोग रहा है। साबुन से नहा रहा। गाडियो से चल रहा है। और सुख भोग रहा है। अविज्ञा होने से सुख की कामना करते है। “नानक सुखिया सब संसार” ।वेद भगवान का छह अंग है। भगवान शिव का सूत्र है। डमरू बजाने से सूत्र का स्वर निकलते है। भगवान शिव कहते है।कि जब तक व्याकरण नही पढते है ।लोक मान्य तिलक ने ज्योतिष से पृथ्वी लोक के बारे मे जानकारी दी। सन्त विचार कैरे। कि किस दिन कौन ग्रहण होगा। नक्षत्र की गति,सूर्य की गति को पढ लिया। क्या ज्योतिष नही है। “उनको गोकुल मे गाय चारते देखा। फिर यमुना मे बंशी बाजते देखा। ” इस भागवत कथा को जानने वाले साढे तीन लोग है।वेद व्यास,श्रीधर स्वामी,संजय को भागवत का ज्ञान है। “भारत मे फिर से आजा बसुरी बाजने वाले “।पांच नाते जो पुराने नही होते है। स्त्री,मित्र,सूर्योदय आदि कभी पुराने नही होते है। भवरो को मष्तिष्क पर भगवान श्रीकृष्ण ने धरण किया। “मुझे पता बता कि मोहन मुकर गए ” वर्षो गुजर गए, भवरे ना गुनगुनाते,।पुरुषार्थ साथ नही देता तो भगवान की शरण मे जाना पडता है। जो सताये हुए है तो वही भक्त होते है।मानस से बढ़कर कोई गन्थ नही है। भागवत कथा जो करे। उसके सामान कोई नही। गोपिया भगवान श्रीकृष्ण की परिक्षाई है। भगवान श्रीराम के भाई लक्ष्मण परिक्षाई है।
इस अवसर पर कार्यक्रम मे मुख्य यजमान पंडित गायत्री प्रसाद उपाध्याय,उमा देवी उपाध्याय सहित सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।




