गाजियाबाद

गौरक्षकों की सूझबूझ से एक बे-सहारा गौमाता की जान बची

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
लोनी। बलराम नगर कॉलोनी में आज सुबह एक दर्दनाक घटना सामने आई, जब एक बे-सहारा गौमाता गलती से एक निर्माणाधीन मकान के खुले सेप्टिक टैंक (सैफ्टिंग टैंक) में गिर गई। टैंक गहरा होने के कारण गौमाता खुद बाहर नहीं निकल पाई और घंटों तक वहीं फंसी रही।
स्थानीय लोगों ने जैसे ही यह घटना देखी, उन्होंने तुरंत गौ रक्षक रवि धामा व लोनी नगरपालिका को इसकी सूचना दी और जेसीबी मशीन की मांग की ताकि गौमाता को गहरे गड्ढे से सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। लेकिन नगरपालिका से तत्काल मशीन उपलब्ध न हो पाने के कारण गौमाता की हालत बिगड़ने लगी।
स्थिति की गंभीरता देखते हुए स्थानीय गौरक्षकों और मोहल्ले के युवाओं ने बिना देरी किए खुद गौ माता को गड्ढे से सुरक्षित बाहर निकालने के लिए मोर्चा संभाला। सभी ने मिलकर रस्सियों की मदद से गौमाता को बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया। करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार गौमाता को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
बाहर निकलने के बाद गौरक्षकों और कालोनी के नागरिकों ने गौमाता की सेवा-शुश्रूषा की, उसे पानी पिलाया और  प्राथमिक उपचार कराया। मौके पर मौजूद लोगों ने सभी गौरक्षकों की सराहना करते हुए कहा कि अगर उन्होंने तत्परता नहीं दिखाई होती तो गौमाता की जान बचाना मुश्किल हो जाता।
स्थानीय निवासी व भाजपा के आर्थिक प्रकोष्ठ जिला संयोजक बबली अग्रवाल व सभासद अंकुश जैन मिकू ने नगरपालिका प्रशासन से यह भी मांग की है कि निर्माणाधीन स्थलों पर खुले सेप्टिक टैंकों को ढकने की व्यवस्था अनिवार्य की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों।
गौरक्षकों की इस मानवीय पहल ने एक बार फिर यह साबित किया है कि जब समाज एकजुट होकर कार्य करता है तो बड़ी से बड़ी समस्या को भी टाला जा सकता है
इसमें योगेश शर्मा, विनीत राठी,मोनू बजरंगी,सुनील कुमार व आशीष के साथ दर्जनों युवाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की
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