नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
लोनी गाजियाबाद : गाजियाबाद, इंदिरापुरम से खबर है — जहां आज एक “बड़े निजी अस्पताल” का उद्घाटन राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री, रक्षा मंत्री और जाने कितने वीवीआईपी हस्तियों के हाथों हुआ।
पूरा प्रशासन पिछले कई दिनों से इस “स्वास्थ्य महाकुंभ” की तैयारियों में लगा हुआ था। सड़कों को पोंछा गया, डिवाइडरों को मेकअप कराया गया, और जहां-जहां धूल थी, वहां विकास की धूल बिछा दी गई।
बताया जा रहा है कि उद्घाटन स्थल के आसपास इतनी सफाई हुई है कि अब स्थानीय लोग पहचान नहीं पा रहे कि यह वही इलाका है या किसी और ग्रह का
जनता के लिए सौगात या शोभायात्रा?
लोगों में चर्चा है कि इस अस्पताल से आम जनता को क्या फायदा होगा?
क्या यहां इलाज सस्ता होगा?
क्या गरीब मरीज को कुछ रियायत मिलेगी?
सूत्रों के अनुसार अस्पताल में आम आदमी को वही मिलेगा जो पहले भी मिलता आया है — “टोकन काउंटर की लंबी लाइन और बिल की मोटी फाइल।”
सिर्फ एक फर्क नजर आएगा— अब बिल का डिज़ाइन और भी ज्यादा आकर्षक होगा।
विकास की चमक सड़क पर भी दिखी!
वीवीआईपी के स्वागत में भोपुरा रोड तक का मेकअप कर दिया गया।
हालांकि भोपुरा रोड के गड्ढों को देखकर विदेशी सैलानी अभी भी यह मान बैठते हैं कि भारत में “क्रेटर टूरिज्म” (गड्ढा पर्यटन) तेजी से बढ़ रहा है।
यू-टर्न ऐसे बने हैं कि अगर गूगल मैप भी देख ले तो खुद “रीकैलकुलेटिंग…” बोलकर हैंग हो जाए!
एयरपोर्ट तो बन गया, पर लैंडिंग अभी भी टेढ़ी है!
गाजियाबाद का एयरपोर्ट अब अंतरराष्ट्रीय चेहरों से गुलजार है,
लेकिन जैसे ही भोपुरा रोड से गुजरना पड़ता है, विदेशी पर्यटक कहते सुने जाते हैं —
“ओह! इस रोड पर तो हमारे स्पेस शटल की ट्रेनिंग हो सकती है!”
जनता का संदेश प्रशासन के नाम:
अब जबकि सारे वीवीआईपी उद्घाटन कर के चले गये है
तो कृपया उन लोगों की भी सुध ले लेना,
जो “जनता” कहलाते हैं —
और जिनके टैक्स से ये सारी रौनकें सजी थीं।
निष्कर्ष:
गाजियाबाद में अब अस्पतालों की संख्या लगातार बढ़ रही है,
पर इलाज की कीमत, सड़क के गड्ढों की तरह —
हर दिन गहराती जा रही है


