लखनऊ

किसी औषधि से कम नहीं छठ मैया को समर्पित किए जाने वाले फल

ठेकुआ सर्दियों के लिए है रामबाण

लखनऊ । महापर्व पर प्रसाद के रूप में प्रयोग होने वाला ठेकुआ भी सर्दियों में फायदेमंद होता है। ये शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। वहीं, प्रयोग में आने वाले फल भी शरीर के लिए बेहद फायदेमंद हैं।
छठ पूजा में फलों का विशेष महत्व है। इनमें से ज्यादातर फल आम दिनों में बाजार में कम ही नजर आते हैं लेकिन छठ पूजा के मद्देनजर ये बहुतायत में मिलते हैं। खास बात यह है कि ये फल औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं। कई प्रकार की बीमारियों से लेकर शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में इन फलों का खास योगदान होता है। आयुर्वेद के विशेषज्ञ भी इन फलों को हमारे शरीर के लिए बेहद उपयोगी बताते हैं। इसके अलावा प्रसाद के रूप में बनाया जाने वाला ठेकुआ और चावल के लड्डू भी पौष्टिक माने गए हैं।
फैकल्टी आॅफ आयुर्वेद कॉलेज के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. जेएन मिश्रा ने बताया कि छठ पूजा में प्रयुक्त होने वाले फल, प्रसाद और सब्जियां औषधीय गुणों से युक्त होती हैं। उन्होंने बताया कि छठ पूजा में पूजन के दौरान प्राय: शकरकंद, सिंघाड़ा, सुथनी, आंवला, बन मकोय, त्रिफला, सीताफल, डाभनींबू (चकोतरा), पानी फल, पपीता, गाजर, कच्ची हल्दी, नारियल, गन्ना, मूली और पत्ते, संतरा, केला, सुपारी, अदरक, ठेकुआ और चावल के लड्डू आदि का प्रयोग किया जाता है। इन सभी की आयुर्वेद में अपनी विशेषता होती है। डॉ. जेएन मिश्रा के अनुसार, छठ मैया को समर्पित की जाने वाली सामग्रियों में कुछ तो शरीर के लिए अमृत समान मानी गई हैं।
छठ पूजा में प्रसाद के रूप में तैयार किए जाने वाले ठेकुआ का विशेष महत्व है। आटे, गुड़ और घी से बनने वाले ठेकुआ का सेवन सर्दियों में लाभकारी होता है। यह सर्दी-जुकाम में फायदेमंद और इम्युनिटी बढ़ाने में सहायक माना जाता है। वहीं, चावल के लड्डू तत्काल ऊर्जा का वाहक होते हैं। डॉ. जेएन मिश्रा ने बताया कि इसमें स्टार्च होता है। यह बुढ़ापे की प्रक्रिया को धीमा करने में सहायक है। स्वास्थ्यवर्धक होने के साथ ही यह पेट को ठंडा रखता है। उन्होंने बताया कि कच्ची हल्दी तो औषधीय गुणों की खान है। इसमें एंटीआॅक्सीडेंट गुण होते हैं और रक्त शोधन के लिए रामबाण मानी गई है। चोट खींचने में भी यह बेहद कारगर है। ठंड में हृदयरोगियों के लिए लाभदायक है।
छठ पूजा की ये सामग्रियां भी औषधि से कम नहीं
बन मकोय – यह औषधीय पौधा होता है। सांस संबंधी विकारों को दूर करने, कुष्ठ और बुखार में फायदेमंद। किडनी, सूजन, बवासीर, दस्त व चर्म रोगों में लाभकारी। मकोय की जड़, तना, पत्ता, फूल और फल के काढ़े का सेवन गठिया दर्द, खांसी, घाव, अपच मूत्र रोग में फायदेमंद। कान दर्द, हिचकी, जुकाम, पीलिया, आंखों के रोग, उलटी व शारीरिक कमजोरी में भी लाभप्रद।
सुधनी – यह एक प्रकार की जड़ है जिसमें फाइबर, आयरन, प्रोटीन, विटामिन व मिनरल्स भरपूर होता है। शरीर के पोषण व पाचन तंत्र मजबूत करने में सहायक। अल्सर में फायदेमंद व भूख की समस्या दूर करने में सहायक। अल्सर में फायदेमंद व भूख की समस्या दूर करने में सहायक।
डाभनींबू (चकोतरा) – इसे छठ मैया का सबसे प्रिय फल माना जाता है। विटामिन सी से भरपूर व शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कारगर।
आंवला- विटामिन सी से भरपूर, इम्युनिटी बूस्टर, सर्दी-जुकाम व संक्रमण में लाभकारी, त्वचा के लिए फायदेमंद। आंखों की रोशनी के साथ ही बालों की समस्या में कारगर। ह्दय रोग में भी लाभकारी।
त्रिफला – हरड़, बहेड़ा व आंवला फलों के मिश्रण से तैयार त्रिफला विषाणु रोधक होती है। शरीर में संक्रमण रोकने के साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है। श्वसन तंत्र भी मजबूत करती है।
सिंघाड़ा – विटामिन ए, सी, मैगनीज, काबोर्हाइड्रेट, सिट्रिक एसिड, एमिलोज, फास्फोराइलेज, प्रोटीन जैसे तत्वों से भरपूर। अस्थमा व वात विकार में लाभकारी। एंटी आॅक्सिडेंट गुणों से भरपूर, टांसिल व अनिद्रा में उपयोगी।
गन्ना- गन्ने का रस कैल्शियम, मैम्नीशियम, आयरन, सोडियम व पोटैशियम से भरपूर। पाचन दुरुस्त रखने व हड्डियों की मजबूती के साथ ही कैंसर में भी लाभकारी। शुगर के रोगी इसे लेने से बचें।
पानी फल – यह मौसमी फल पोटैशियम से भरपूर है और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है।
नारियल – स्किन एलर्जी, मुंहासों और पेट में कीड़े मारने में सहायक। शरीर की इम्युनिटी भी बढ़ाता है।
पपीता – पाचन क्रिया में सहायक, एनर्जी और इम्युनिटी बूस्टर का काम करता है।

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