सिंगरौली

 बालाजी फिलिंग स्टेशन पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव

शहर के कई पेट्रोल पंपों पर नहीं हैं उपभोक्ताओं के लिए जरूरी सुविधाएं

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।

 सिंगरौली। जिले में पेट्रोल पंप संचालकों की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही है। नियमों को ताक पर रखकर चल रहे पेट्रोल पंप न केवल ग्राहकों की जेब पर डाका डाल रहे हैं, बल्कि सरकारी मानकों की भी खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है गनियारी कचरा प्लांट के समीप स्थित बालाजी फिलिंग स्टेशन पेट्रोल पंप का, जहां ग्राहकों को पेट्रोल तो मिल रहा है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर ठगा जा रहा है।
जिला मुख्यालय से करीब पांच किलोमीटर दूर गनियारी बीजपुर रोड पर स्थित यह पेट्रोल पंप ग्राहकों की सुविधाओं के मामले में पूरी तरह फेल साबित हो रहा है। यहां वाहनों में हवा भरने के लिए कंप्रेशर मशीन तो है, लेकिन उसे चलाने वाला कोई नहीं मिलता। ग्राहकों को हवा के लिए दूसरे पंपों पर भटकना पड़ता है।
साथ ही, शौचालयों में ताले लटके हैं, पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं, और परिसर के चारों ओर गंदगी का अम्बार लगा हुआ है। ग्राहकों ने बताया कि पंप संचालक को नियमों के तहत सभी बुनियादी सुविधाएं जैसे हवा, शौचालय, पीने का पानी और शिकायत पुस्तिका निश्शुल्क उपलब्ध करानी होती हैं, लेकिन बालाजी फिलिंग स्टेशन में इनमें से कोई भी सुविधा सही रूप से नहीं मिल रही है।
लाइसेंस मिलने के बाद भूल गए नियम
पेट्रोल पंप संचालन के लिए कंपनियों द्वारा स्पष्ट गाइडलाइन जारी की जाती है। इन गाइडलाइनों के तहत हर पंप को निम्न सुविधाएं देना अनिवार्य है जहां ग्राहकों के लिए स्वच्छ शौचालय पीने के पानी की व्यवस्था वाहनों में हवा भरने के लिए कंप्रेशर मशीन और शिकायत पुस्तिका लेकिन बालाजी फिलिंग स्टेशन ने इन नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि “जब सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं तो ऐसे पेट्रोल पंप का लाइसेंस निरस्त किया जाना चाहिए।”
ग्राहकों की शिकायतों पर भी ध्यान नहीं
वाहन चालकों का कहना है कि शिकायत करने के बावजूद पंप संचालक कोई सुधार नहीं करते। शिकायत पुस्तिका तो रखी गई है, लेकिन उसे सिर्फ औपचारिकता के तौर पर रखा गया है। शिकायत दर्ज होने के बाद भी उस पर कोई कार्रवाई नहीं होती। ग्राहकों ने सवाल उठाया है कि जब नियमों के उल्लंघन पर पंप का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है, तो जिम्मेदार अधिकारी चुप क्यों हैं?
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, जिले के जिम्मेदार अधिकारी भी इस पंप की जांच करने से कतराते हैं। कई बार शिकायतें पहुंचने के बाद भी मौके पर जांच नहीं की गई। लोगों का कहना है कि प्रशासन की यह चुप्पी कहीं न कहीं मिलीभगत का संकेत देती है। ग्राहकों की मांग है कि पेट्रोल की गुणवत्ता और सुविधाओं की जांच हो स्थानीय बाइक और वाहन चालकों ने कलेक्टर और जिला आपूर्ति अधिकारी से मांग की है कि बालाजी फिलिंग स्टेशन पर तत्काल पेट्रोल की गुणवत्ता की जांच की जाए। साथ ही, शौचालय, हवा मशीन और सफाई व्यवस्था को लेकर भी कठोर कार्रवाई की जाए।
नियमों के उल्लंघन पर हो सख्त कार्यवाही
जानकारों का कहना है कि मार्केटिंग डिसिप्लिन गाइडलाइंस के तहत पेट्रोल पंप मालिकों को आम लोगों को ये सुविधाएं देना अनिवार्य है। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कर लाइसेंस रद्द किया जा सकता है और भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है। अब देखना यह है कि प्रशासन कब जागता है सवाल यह उठता है कि जब ग्राहकों से हर लीटर का पूरा पैसा वसूला जा रहा है, तो उन्हें सुविधाओं से वंचित क्यों रखा जा रहा है? अब जिले की जनता की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या बालाजी फिलिंग स्टेशन जैसे नियम तोड़ने वाले पंपों पर कोई ठोस कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?
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