गोड्डा

गोड्डा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में जांच टीम ने पाई अनियमितता 

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
गोड्डा। सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में जांच टीम द्वारा अनियमितता पाई गई है। राज्य औषधि नियंत्रण निदेशालय के निर्देश पर देवघर के औषधि निरीक्षक चंदन प्रसाद कश्यप द्वारा बीते दिनों औचक निरीक्षण में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि ब्लड बैंक में रक्त जांच के लिए अनिवार्य एलाइजा मशीन (Eliza Reader) का उपयोग नहीं किया जा रहा था। इसके स्थान पर रैपिड किट से एचआईवी और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों की जांच की जा रही थी, जो मानक प्रक्रिया के विरुद्ध है। टीम ने रिकॉर्ड संधारण में भी भारी गड़बड़ी पाई है। ब्लड स्टोरेज, टेस्टिंग रजिस्टर और वितरण के दस्तावेज अधूरे पाए गए। निरीक्षण रिपोर्ट में भवन की जर्जर स्थिति का भी उल्लेख किया गया है। औषधि निरीक्षक ने कुल 20 प्रकार की कमियां सूचीबद्ध करते हुए अनुशंसा की है कि सुधारात्मक कदम उठाए जाने तक ब्लड बैंक का संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया जाए।
तो क्या ब्लड बैंक अपने स्थापना कल से ही बैसाखी पर चल रहा
अचानक से ब्लड बैंक के जांच पड़ताल की प्रक्रिया के उपरांत एक बात उन कर सामने आई की ब्लड बैंक अपनी अर्हता पूरी करने में अक्षम है। तो क्या गोड्डा सदर अस्पताल का ब्लड बैंक अपने स्थापना काल से ही बैसाखी पर चल रहा है। जबकि पूर्व डीसी एवं पूर्व सीएस के कार्यकाल में ब्लड बैंक के सभी कागजी औपचारिकताओं को पूरी कर रक्त अधिकोष केंद्र का दर्जा दिया गया था। तो कैसे ब्लड बैंक का दर्जा मिल गया, यह सवालों के घेरे में है।
जिले में भरमार है थैलेसीमिया के मरीज, कैसे हो इनके रक्त की व्यवस्था
जिले में थैलेसीमिया के रोगी भारी पड़े हैं। विभाग के आंकड़े के अनुसार तकरीबन 100 से अधिक मरीज केवल गोड्डा जिला में थैलेसीमिया से पीड़ित बताए जाते हैं। उन्हें ब्लड की जरूरत पड़ती रहती है। ऐसे में अगर ब्लड बैंक पूरी तरह से खुद अस्वस्थ हो तो थैलेसीमिया मैरिज को ब्लड की आपूर्ति को लेकर सदर अस्पताल को नाकोचने चबाने पड़ेंगे।
क्या कहते हैं सदर अस्पताल के उपाधीक्षक
सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. तारा शंकर झा ने बताया कि विभाग से अभी कोई औपचारिक पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। जांच में जो भी कमियां पाई गई थीं, उन्हें दूर करने की प्रक्रिया जारी है और रैपिड टेस्ट के स्थान पर एलाइजा टेस्ट शुरू कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि गोड्डा जिले के करीब 100 थैलेसीमिया मरीज इस ब्लड बैंक पर निर्भर हैं, जिन्हें हर माह रक्त की आवश्यकता होती है। यदि ब्लड बैंक अस्थायी रूप से बंद भी होता है तो मरीजों की जरूरतें निजी ब्लड बैंकों की सहायता से पूरी की जाएंगी।
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