गोड्डा
स्मृति पर्व पर याद किये गये महाकवि विद्यापति

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
गोड्डा। मैथिल कोकिल महाकवि विद्यापति के स्मृति पर्व पर विद्यापति भवन में विद्यापति सांस्कृतिक परिषद के तत्वावधान में स्मृति सभा का आयोजन किया। इस दौरान उपस्थित गणमाण्यों ने मैथिल कोकिल महाकवि विद्यापति के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके बताए गए मार्ग पर चलने का आह्वान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता परिषद के पूर्व अध्यक्ष परमानंद चौधरी ने किया। जबकि संचालन विभिन्न खेल संघ के सचिव सुरजीत झा ने किया। मौके पर गोड्डा कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. श्यामा कांत झा ने कहा कि महाकवि विद्यापति अनेक भाषाओं के विद्वान थे।उन्होंने अनेक भाषाओं में ग्रंथ लिखे हैं। वे आज भी समाज के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। हमें उनकी साधना और सच्ची लगन को ध्यान में रखते हुए समाज की उन्नति के विषय में सोचने की जरूरत है। प्लस टू गोड्डा के पूर्व प्राचार्य राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक माधव चंद्र चौधरी ने महाकवि विद्यापति के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला।उन्होंने कहा कि उन्होंने 13 ग्रंथों की रचना की है। जिनमें अधिकांश ग्रंथ संस्कृत व अन्य भाषा में तथा एक ग्रंथ में मैथिली भाषा में रचित है। उन्होंने श्री कृष्ण, महादेव और गंगा पर जो कविता लिखी है, वह द्वितीय है। दुनिया में अधिक शोध महाकवि विद्यापति की रचना पर ही हुआ है। उन्होंने उनकी कालजई रचनाओं को संग्रहित कर रखने पर जोर दिया। अधिवक्ता दीनानाथ झा ने विद्यापति की रचनाओं को संग्रहित करने सहित अनेक आध्यात्मिक पुस्तकों के रखरखाव के लिए एक आध्यात्मिक पुस्तकालय निर्माण पर जोर दिया तथा इस दिशा में प्रक्रिया शुरू करने की बात कही। डॉ सत्येंद्र मिश्रा ने कहा कि सच्ची लगन और साधना से भगवान को प्राप्त किया जा सकता है। यह आज भी संभव है। रामकृष्ण परमहंस इसका उदाहरण है। परिषद के सचिव डॉ बंशीधर मिश्रा ने कहा कि महान विभूति को याद कर अपने में शुद्धता लाने का प्रयास करना चाहिए। महाकवि मैथिल कोकिल की जीवनी से हमें सीख लेनी चाहिए। परितोष पाठक ने उगना रे मोरा कत्अ गेला…से संबंधित विचार व्यक्त किया।उन्होंने कहा कि उन्होंने महादेव, गंगा और श्री कृष्णा पर सबसे अधिक कविता लिखी है। भगवान शिव उगना के रूप में उनके पास रहे यही उनकी सबसे सच्ची साधना को दर्शाता है। अंतेवासी सर्वजीत झा ने समाज में बढ़नी नशाखोरी पर चिंता जताई इसके अलावा दिलीप कुमार झा, निश्चल ठाकुर, शोभाकांत झा, सौरभ परासर, योगेश चंद्र झा, परिणीता झा आदि ने भी विचार व्यक्त किया। गोष्टी के अंत में दिवंगत विद्वान, कवि व समाज के लोगों को श्रद्धांजलि दी गई। गोष्ठी में समाज के दर्जनों लोग उपस्थित थे।



