बागपत
टयौढ़ी गांव में बंदरों का आतंक, ग्रामीणों का जीना हुआ दुश्वार

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बागपत। जनपद के टयौढ़ी गांव में इन दिनों बंदरों के आतंक ने ग्रामीणों का जीना मुश्किल कर दिया है। सुबह से शाम तक झुंड के झुंड बंदर गलियों और छतों पर घूमते रहते हैं, जिससे न केवल महिलाएं और बच्चे भयभीत हैं, बल्कि किसान और बुजुर्ग भी गंभीर परेशानी झेल रहे हैं। गांव के लोग अब घरों से निकलने से पहले चारों ओर झांककर देखते हैं कि कहीं बंदरों का झुंड पास तो नहीं।
सैकड़ों बंदरों का जमावड़ा, आपसी जंग से बढ़ा खतरा
ग्रामीण बताते हैं कि गांव में अब बंदरों के कई बड़े झुंड बस गए हैं। 40-40 और 50-50 बंदरों के झुंड अलग-अलग इलाकों में डेरा डाले हुए हैं। कभी-कभी ये झुंड एक-दूसरे के क्षेत्र में घुस आते हैं तो आपस में जबरदस्त जंग छिड़ जाती है।
स्थिति तब और खतरनाक हो जाती है जब दोनों झुंडों के बीच कोई ग्रामीण फंस जाता है —
ऐसे में बंदर अपनी आपसी लड़ाई भूलकर उस व्यक्ति पर ही टूट पड़ते हैं। कई बार ग्रामीणों को जान बचाकर भागना पड़ा है।
ग्रामीणों का कहना है कि पहले दो-चार बंदर दिखते थे, अब तो सैकड़ों हो गए हैं। झुंडों के बीच जंग में अगर आदमी बीच में आ जाए तो समझो उसकी खैर नहीं। हाल के दिनों में बंदरों द्वारा कई लोगों को घायल करने की घटनाएं भी सामने आई हैं। बच्चों के स्कूल जाने में भी दिक्कत हो रही है, क्योंकि रास्ते में बंदरों के झुंड आ जाते हैं।
गांव वालों ने प्रशासन से कई बार शिकायत की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ग्रामीणों की मांग है कि वन विभाग गांव में तत्काल बंदर पकड़ो अभियान चलाए या फिर किसी सुरक्षित स्थान पर उनका पुनर्वास किया जाए।
गांव की महिलाओं का कहना है कि प्रशासन को स्कूलों और गलियों में गश्त लगवानी चाहिए, ताकि बच्चे सुरक्षित रह सकें।



