गाजियाबाद

लोनी में खनन माफियाओं का आतंक 

प्रशासन माफियाओं के सामने बेबस व लाचार 

अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा गैरकानूनी कारोबार, ग्रामीणों की शिकायतें हो रहीं अनसुनी

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो

लोनी गाजियाबाद : खेकड़ा क्षेत्र में अवैध रेत खनन का धंधा खुलेआम चल रहा है। पुलिस, राजस्व विभाग और खनन अधिकारियों की मिलीभगत के कारण यह गैरकानूनी कारोबार रुकने की बजाय लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों द्वारा बार-बार सम्बंधित अधिकारियों से शिकायत किए जाने के बावजूद भी खनन माफियाओं के खिलाफ कोई ठोस कार्यवाही नहीं हो पा रही है।
सुभानपुर, संगुरपुर, पंचायरा नवादा और दिल्ली की ठोकर तक फैला नेटवर्क
जानकारी के मुताबिक, इस धन्धें से जुड़े लोग सुभानपुर, संगुरपुर, पंचायरा, नवादा गांवों के पास और दिल्ली सीमा से सटे क्षेत्रों में अवैध रेत खनन का काम रात होते ही शुरू हो जाता है। बताया जाता है कि इस पूरे नेटवर्क में लगभग आधा दर्जन लोग सक्रिय हैं, जो खनन, भंडारण और रेत की आपूर्ति की जिम्मेदारी संभालते हैं।
रेत माफियाओं की नई जमात सक्रिय
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, अब इस अवैध कारोबार में कुछ नए रेत माफियाओं के नाम भी सामने आए हैं, जो पुराने नेटवर्क से जुड़कर तेजी से अपने पैर पसार रहे हैं। दिन ढलते ही दर्जनों ट्रैक्टर-ट्रॉली और बड़ी गाड़ियाँ स्टॉक प्वाइंट से भरकर दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न इलाकों में रेत सप्लाई करती हैं।
रेकी करने वाले और मुखबिरों का नेटवर्क भी मजबूत
रेत माफियाओं ने अपनी सुरक्षा और प्रशासनिक गतिविधियों पर नजर रखने के लिए रेकी करने वालों की भी तैनाती कर रखी है। जैसे ही किसी विभागीय जांच या पुलिस गश्त की भनक लगती है, खनन का काम कुछ देर के लिए रोक दिया जाता है, जिससे कोई सबूत हाथ न लगे।
ग्रामीणों की शिकायतें बेअसर, कार्यवाही के नाम पर सिर्फ दिखावा
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार प्रशासन को शिकायतें कर चुके हैं, लेकिन हर बार सिर्फ खानापूर्ति की जाती है। अधिकारी मौके पर तभी पहुंचते हैं जब रेत खनन करने वाले वहां से रफूचक्कर हो जाते हैं। अधिकारी औपचारिकता पूरी करते हैं, फिर कुछ ही घंटों में रेत खनन पुनः शुरू हो जाता है।
राजस्व और खनन विभाग की भूमिका पर सवाल
ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि राजस्व और खनन विभाग के अधिकारी इस खेल में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से शामिल हैं। मोटी रकम लेकर माफियाओं को संरक्षण दिया जा रहा है, जिसके चलते न तो पर्यावरण की चिंता की जा रही है और न ही सरकारी राजस्व की।
पर्यावरण पर गहराता संकट
लगातार हो रहे रेत खनन से नदियों और तालाबों का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है। जलस्तर गिरने लगा है और खेतों की उपजाऊ मिट्टी भी प्रभावित हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द सख्त कार्यवाही नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में क्षेत्र में गंभीर पर्यावरणीय संकट खड़ा हो सकता है।
स्थानीय प्रशासन मौन क्यों?
ग्रामीणों की मांग है कि उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और इसमें शामिल पुलिस, राजस्व व खनन विभाग के अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही रेत माफियाओं के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चलाया जाए ताकि यह अवैध कारोबार पूरी तरह बंद हो सके।
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