लोनी में बाल श्रम का बोलबाला, सरकारी निर्देश धरे रह गए

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
लोनी/ग़ाज़ियाबाद : एक ओर उत्तर प्रदेश सरकार बाल श्रम, बाल विवाह और मानव तस्करी जैसे सामाजिक अपराधों पर सख्ती बरतने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर लोनी क्षेत्र में हालात बिल्कुल उलट नजर आ रहे हैं। इलाके के कई मोटर व कार वाशिंग प्वाइंट्स, साइकिल–मोटरसाइकिल मरम्मत की दुकानों, अवैध फैक्ट्रियों और मिनरल वाटर यूनिटों पर कम उम्र के बच्चे खुलेआम काम करते देखे जा रहे हैं।
बाल दिवस जैसे महत्वपूर्ण दिन पर भी लोनी की गलियों में छोटे-छोटे बच्चे भारी बाल्टियाँ उठाते, बाइक धोते, औजार संभालते और दुकानों पर माल ढोते दिखाई दिए। यह न सिर्फ समाज की असंवेदनशीलता को उजागर करता है बल्कि बाल श्रम निषेध कानून की खुलेआम अनदेखी भी है।
कानून की अनदेखी, जिम्मेदारी गायब
सरकार ने 14 से 18 वर्ष के किशोरों को किसी भी जोखिमपूर्ण काम में लगाने पर रोक लगा रखी है। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर इन नियमों की कोई परवाह नहीं की जा रही।
कानून के तहत—
बाल श्रम करवाने पर एक महीने तक की साधारण कैद, और 10,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
इसके बावजूद लोनी में इन प्रावधानों का पालन होता नहीं दिखता, जिससे श्रम विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
इन क्षेत्रों में सर्वाधिक सक्रिय बाल श्रमिक
रिपोर्ट के अनुसार लोनी के कई हिस्सों में बड़ी मात्रा में नाबालिग बच्चे मजदूरी करते नजर आए, जिनमें प्रमुख रूप से—
लोनी मेन बाज़ार,नीलम फैक्ट्री रोड ,दो नम्बर, इंद्रापुरी, जवाहर नगर और लोनी बोर्डर क्षेत्र में बाल श्रमिक मजदूरी करते देखे जा सकते हैं
इन जगहों पर सुबह से देर रात तक बच्चे कार–बाइक वॉशिंग, सर्विसिंग, पैकेजिंग, पानी भरने और दुकानों के अन्य कामों में जुटे पाए गए।
श्रम विभाग की भूमिका पर उठे सवाल
स्थानीय निवासियों का कहना है कि विभाग कभी-कभार औपचारिक निरीक्षण तो करता है, लेकिन ठोस कार्यवाही न के बराबर होती है। इस कारण कारोबारियों व फैक्ट्री मालिकों में डर खत्म है और बाल श्रम क्षेत्र में बेधड़क जारी है।
लोगों का यह भी आरोप है कि कई अवैध यूनिटें अधिकारियों की मिलीभगत से बिना रोक-टोक चल रही हैं।
बाल श्रम रोकना प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी
विशेषज्ञों का कहना है कि बाल श्रम बच्चों के उज्जवल भविष्य पर कुठाराघात है। प्रशासन को नियमित और कड़ी कार्यवाही करने की आवश्यकता है, वहीं आम नागरिकों को भी ऐसी घटनाओं की सूचना संबंधित विभाग तक पहुँचानी चाहिए, ताकि बच्चों को शिक्षा और सुरक्षित भविष्य मिल सके।


