
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बोकारो। अखिल भारतीय साहित्य परिषद् बोकारो की मासिक काव्य गोष्ठी परिषद् के उपाध्यक्ष दयानंद सिंह की अध्यक्षता में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ एवं उनकी प्रस्तुति समाज और समरसता काव्य का पाठ किया।गोष्ठी की शुरुआत माँ भारती के चरणों में दीप प्रज्ज्वलित कर मंगलाचरण एवं पूष्पांजली कर की गयी।सुनील कुमार की सरस्वती वंदना एवं कविता ‘ प्रेम की फुलवारी में सबका फूल खिलने दो’ से गोष्ठी का शुभारंभ हूआ।डाॅं आशा पूष्प की रंग बदलेगा ना मेरा आसमां गाकर खुब वाह वाही लूटी।डाॅं नरेन्द्र राय की भोजपूरी कविता अब तो देर हो तरुए,बताव देश के अपना,परिषद् के महासचिव ब्रह्मानंद गोस्वामी’ विकल राही’ की समाजीक समरसता बहूत जरुरी हैं, इस पर विस्तार से प्रकाश डाला।हास्य कवि वकील दीक्षित की हॅंस हॅंस बोली नन्हीं चिङैयाॅं चल अपना गाँव रे,गाकर श्रोताओं को गद् गद् कर गया। गोष्ठी का अद्भुत संचालन करते हूए चर्चीत कवियत्री करुणा कलिका की में नारी हूँ नारी का प्रतिमान लिखती हूँ,गाकर खुब सराहना पायी।परिषद् के मिडिया प्रभारी गंगेश कुमार पाठक की समझदार कातिल था, मुहब्बत करके छोङ गया,सुनकर श्रोता मंत्रमुग्ध हो गये। प्रसिद्ध कवियत्री गीता कुमारी गुस्ताख की मेरा देश है शिरमौर, मचां सारी दूनिया में शोर,रिंकू गिरि’रतन’ की जीवन एक केनवास की तरह है, कभी उस पर धूप कभी बादलों की छाया गाकर श्रोताओं को गमगीन कर गयी।ओमान से भारत आयी हूई विभा तिवारी की कविता पूरब की धरती सिंदूरी गाकर पूरे माहोल को देशभक्ति के रंग में रंग दिया।युवा कवि सत्यम हरिशंकर पांडे ने संस्कृत में कविता वन्देमातरम् भारतवर्षम् सुनकर उपस्थित सभी श्रोताओंनो तालीयां बजायी।दीनानाथ ठाकुर की जिंदा रहूँ तो घर में तिरंगा,मर जाऊँ तो कफन तिरंगा,देशभक्तिमय वातावरण बना गया। छोटी बच्ची शगुन कृति की बाल कविता प्रसंसनीय रही।गणमान्य में संघ के सरयु गोस्वामीउपस्थित थे। अंत में भगवान पाठक ने सभी का धन्यवाद् ज्ञापन किया।ढेर सारी संख्या में उपस्थित श्रोता काव्य गोष्ठी का भरपूर आनंद लिया।



