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राम मंदिर शिखर पर धर्म ध्वज फहराया 

पीएम मोदी-मोहन भागवत की मौजूदगी में 'नया युग'

अयोध्या। श्री राम मंदिर के शिखर पर प्रधानमंत्री मोदी और मोहन भागवत की उपस्थिति में धर्म ध्वज फहराया गया, जो एक नए युग का सूत्रपात दशार्ता है। दस फीट ऊंचे भगवा ध्वज पर सूर्य और ओम की छवि है, जो भक्तों में खुशी की लहर दौड़ा गई। यह पवित्र विवाह पंचमी के शुभ अवसर पर हुआ, जिसका आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार 25 नवंबर को विवाह पंचमी के अवसर पर राम मंदिर के शिखर पर भगवा ध्वज फहराया। पीएम मोदी ध्वजारोहण समारोह में शामिल होने वाले उच्च-स्तरीय गणमान्य व्यक्तियों में शामिल थे, साथ ही यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भागवत भी अन्य उपस्थित थे। दस फीट ऊंचे और बीस फीट लंबे धर्म ध्वज पर भगवान श्री राम के तेज और पराक्रम के प्रतीक सूर्य की छवि अंकित है, जिस पर कोविदारा वृक्ष की छवि के साथ ओम अंकित है।
पारंपरिक उत्तर भारतीय नागर स्थापत्य शैली में निर्मित श्री राम जन्मभूमि मंदिर शिखर पर भगवा ध्वज लहराते ही भक्त खुशी से झूम उठे। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्री अयोध्या धाम में भगवान राम के भव्य मंदिर में ध्वजारोहण किसी यज्ञ की पूणार्हुति नहीं, बल्कि एक नए युग का सूत्रपात है। मैं इस अवसर पर राम भक्तों की ओर से प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त करता हूँ।
यह समारोह मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को भगवान राम और देवी सीता के विवाह पंचमी के अभिजीत मुहूर्त के साथ संयोग से मनाया गया, जो दिव्य मिलन का प्रतीक है। यह दिन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि यह नौवें सिख गुरु, गुरु तेग बहादुर जी के शहादत दिवस का भी प्रतीक है, जिन्होंने 17वीं शताब्दी में अयोध्या में 48 घंटे तक ध्यान किया था, जिससे इस दिन का आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।
राम मंदिर के दर्शन से पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने सप्तमंदिर का भी दौरा किया, जहाँ महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, महर्षि वाल्मीकि, देवी अहिल्या, निषादराज गुहा और माता शबरी को समर्पित मंदिर हैं। मंदिर का शिखर पारंपरिक उत्तर भारतीय नागर शैली में बनाया गया है, जबकि आसपास का 800 मीटर का परिक्रमा परकोटा दक्षिण भारतीय स्थापत्य कला के तत्वों को प्रदर्शित करता है, जो भारत की विविध मंदिर परंपराओं के सम्मिश्रण को दशार्ता है।
अयोध्या में राम मंदिर के शिखर पर भगवा ध्वज फहराकर पीएम मोदी ने सदियों पुराने सपने के साकार होने और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का उद्घोष किया, इसे संघर्ष से विजय और सामूहिक भागीदारी का प्रतीक बताया। यह ध्वज भारतीय सभ्यता के पुनरुत्थान और रामराज्य के आदर्शों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संदेश देता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर के 191 फुट ऊँचे शिखर पर औपचारिक रूप से भगवा ध्वज फहराया, जो मंदिर निर्माण के पूरा होने का प्रतीक है। इस समारोह में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद थे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज अयोध्या नगरी भारत की सांस्कृतिक चेतना के एक और उत्कर्ष बिंदु की साक्षी बन रही है। आज संपूर्ण भारत, संपूर्ण विश्व राममय है। हर रामभक्त के हृदय में अद्वितीय संतोष है, असीम कृतज्ञता है, अपार, अलौकिक आनंद है।
मोदी ने कहा कि सदियों के घाव भर रहे हैं। सदियों की वेदना आज विराम पा रही है। सदियों का संकल्प आज सिद्धि को प्राप्त हो रहा है। आज उस यज्ञ की पूणार्हुति है, जिसकी अग्नि 500 वर्ष तक प्रज्वलित रही। जो यज्ञ एक पल भी आस्था से डिगा नहीं, एक पल भी विश्वास से टूटा नहीं। उन्होंने कहा कि आज भगवान श्रीराम के गृभगृह की अनंत ऊर्जा, श्रीराम परिवार का दिव्य प्रताप, इस धर्मध्वजा के रूप में इस दिव्यतम, भव्यतम मंदिर में प्रतिष्ठापित हुआ है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह धर्म ध्वज संकल्प का प्रतीक है। यह धर्म ध्वज संघर्ष से उत्पन्न विजय की गाथा है। यह धर्म ध्वज सदियों से संजोए गए स्वप्न का साकार रूप है। यह संतों की भक्ति और समाज की सामूहिक भागीदारी का पावन परिणाम है। आने वाली सदियों और सहस्राब्दियों तक, यह धर्म ध्वज भगवान राम के आदर्शों और सिद्धांतों का उद्घोष करता रहेगा। ये धर्मध्वजा केवल एक ध्वजा नहीं, ये भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण का ध्वज है। इसका भगवा रंग, इसपर रचित सूर्यवंश की ख्याति, वर्णित ॐ शब्द और अंकित कोविदार वृक्ष रामराज्य की कीर्ति को प्रतिरूपित करता है।
नरेंद्र मोदी ने कहा कि ये ध्वज…संकल्प है, सफलता है! ये ध्वज…संघर्ष से सृजन की गाथा है, सदियों से चले आ रहे स्वप्नों का साकार स्वरूप है। ये ध्वज…संतों की साधना और समाज की सहभागिता की सार्थक परिणीति है। उन्होंने कहा कि ये धर्मध्वज प्रेरणा बनेगा कि प्राण जाए, पर वचन न जाए अर्थात जो कहा जाए, वही किया जाए। ये धर्मध्वज संदेश देगा – कर्मप्रधान विश्व रचि राखा अर्थात विश्व में कर्म और कर्तव्य की प्रधानता हो। ये धर्मध्वज कामना करेगा – बैर न बिग्रह आस न त्रासा, सुखमय ताहि सदा सब आसा यानी भेदभाव, पीड़ा, परेशानी से मुक्ति और समाज में शांति एवं सुख हो।

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