गाजियाबाद
राजघाट से शुरू हुई गांधीवादी पदयात्रा दिल्ली पहुँची
संविधान दिवस पर दिया लोकतंत्र बचाने का संदेश

एक हजार किलोमीटर पैदल चलने के बाद जंतर-मंतर पर हुआ शक्ति प्रदर्शन
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
नई दिल्ली/लोनी। वाराणसी से शुरू हुई “राजघाट से राजघाट — एक कदम गांधी के साथ” पदयात्रा मंगलवार को लगभग 1000 किलोमीटर का सफर तय कर राजधानी नई दिल्ली पहुँची। संविधान दिवस के अवसर पर सुबह-सुबह पदयात्रियों ने राजघाट पहुँचकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की और उन्हें श्रद्धांजलि दी।
गांधी समाधि पर श्रद्धांजलि देने के बाद सभी पदयात्री जंतर-मंतर पहुँचे, जहाँ यह यात्रा एक बड़े जनसमूह में परिवर्तित हो गई। देशभर से गांधीवादी विचारधारा से जुड़े लोगों ने बैठक में भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत क्रांतिकारी गीतों से हुई और इसके उपरांत पदयात्रियों का सम्मान समारोह आयोजित किया गया।
सर्व सेवा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंदन पाल ने पदयात्रा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “देश चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है और यह यात्रा सामाजिक जागरण का प्रतीक बनेगी।” संगठन के महामंत्री अरविंद अंजुम ने पूरी यात्रा के अनुभव साझा करते हुए कहा कि देश आज शोषणकारी प्रवृत्तियों के जोखिम में है और जन-जागरण का यह अभियान आवश्यक है।
यात्रा के प्रमुख संयोजक तथा उत्तर प्रदेश सर्वोदय मंडल के अध्यक्ष रामधीरज ने आगे की रणनीति और आगामी जनांदोलनों पर चर्चा करते हुए अधिक से अधिक लोगों से गांधीवादी आंदोलन से जुड़ने की अपील की।
सभा में सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने पर्यावरण, लोकतंत्र और संवैधानिक अधिकारों पर मंडरा रहे खतरों की ओर संकेत किया। वहीं जाने-माने राजनीतिक चिंतक योगेंद्र यादव ने गांधीवादी संघर्षों को समय की ज़रूरत बताते हुए आंदोलन को आगे बढ़ाने की बात कही।
कार्यक्रम में कुमार प्रशांत, नन्दलाल मास्टर और कई अन्य वरिष्ठ वक्ताओं ने भी संबोधित किया और इसे संघर्ष की नई शुरुआत बताया।
इस अवसर पर तीन पुस्तकों का विमोचन किया गया और अंत में डॉ. संत प्रकाश ने संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन करवाते हुए उपस्थित लोगों को लोकतंत्र की रक्षा के लिए संकल्प दिलाया।
कार्यक्रम संचालन का जिम्मा अरविंद अंजुम और नन्दलाल मास्टर ने संभाला, वहीं सर्व सेवा संघ युवा प्रकोष्ठ के संयोजक भूपेश भूषण ने सभी पदयात्रियों और अतिथियों का स्वागत किया। संजय सिंह ने कहा कि यह यात्रा संविधान, सद्भाव, लोकतंत्र और गांधी के विचारों के संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।
यात्रा में शामिल प्रमुख प्रतिभागी
चंदन पाल, रामधीरज, अरविंद अंजुम, नंदलाल मास्टर, भूपेश भूषण, योगेंद्र यादव, मेधा पाटकर, संजय सिंह, सोमनाथ रोड़े, संजय राय, सतीश मराठा सहित कई गांधीवादी संगठनों के प्रतिनिधि और लगभग 80 से अधिक लगातार चल रहे पदयात्री शामिल रहे।

