
विषय: “जय हो माता-पिता की” और समाज निर्माण का नया संकल्प
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बागपत। प्रश्न 1: वेद प्रकाश जी, “जय हो माता-पिता की” का नारा पूरे देश में लोकप्रिय हो रहा है। इसकी प्रेरणा आपको कहां से मिली?
वेद प्रकाश गुप्ता: आज का युवा अपने घर, अपने माता-पिता और अपनी जड़ों से दूर होता जा रहा है। शादी, करियर, लाइफ-स्टाइल—सबकी दौड़ में माता-पिता सम्मान को पीछे छोड़ दिया गया था। मैंने देखा कि लोग देवताओं की जय तो बोलते हैं, पर घर के देवताओं—मां-बाप—को भूल जाते हैं। वहीं से मेरे मन में भाव उठा कि “प्रथम जय, प्रथम सम्मान—माता-पिता का होना चाहिए।”
इसी सोच ने “जय हो माता-पिता की” को एक आंदोलन बनाया।
प्रश्न 2: आप बहन-बेटी की रक्षा को अपने मिशन की रीढ़ बताते हैं। इस दिशा में संघ क्या काम कर रहा है?
वेद प्रकाश गुप्ता: समाज का पहला धर्म है—नारी सम्मान। बहन-बेटी सुरक्षित होंगी तभी समाज सुरक्षित होगा।
हमने देशभर में ‘बहन बेटी सुरक्षा चौकियाँ’, स्वरक्षा प्रशिक्षण शिविर, और कानूनी सहायता कैम्प चलाए हैं।
हम युवाओं को सिखाते हैं कि नारी रक्षा केवल कंधे की ताकत से नहीं—संस्कार, संवेदना और साहस से होती है।
प्रश्न 3: आपने पति-पत्नी व्रत का पालन करने पर जोर दिया है। आज के बदलते समय में आप इसे कैसे देखते हैं?
वेद प्रकाश गुप्ता: शादी अब केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि एक साझेदारी है। पति-पत्नी व्रत का अर्थ यह नहीं कि सिर्फ महिलाएं पालन करें—यह दोनों के लिए समान रूप से लागू है।
हम लोगों को समझाते हैं कि—
अगर पति पत्नी का सम्मान करेगा तो घर खुशहाल होगा।
अगर पत्नी पति का साथ देगी तो जीवन आसान होगा।
और अगर दोनों साथ रहकर व्रत निभाएंगे तो परिवार, समाज और संस्कार—तीनों सुरक्षित रहेंगे।
प्रश्न 4: जात-पात, ऊँच-नीच के भेदभाव को खत्म करने का आपका संकल्प बहुत बड़ा है। इस दिशा में आपने क्या कदम उठाए?
वेद प्रकाश गुप्ता: भारत की असली ताकत एकता है, विभाजन नहीं।
हम चौपालों, पंचायतों और शहरी सभाओं में जाकर कहते हैं—
“अगर खून एक है, सांसें एक हैं, धरती एक है…
तो जाति का अहंकार क्यों?”
हमने कई ऐसे विवाह कराए हैं जो जातिगत भेदभाव में फंसे थे।
हमारे संघ का सिद्धांत साफ है—
मानव एक, समाज एक, राष्ट्र एक।
प्रश्न 5: आप कहते हैं कि राक्षस प्रवृत्ति को समाप्त करने के लिए शक्तिशाली युवकों को तैयार करना ज़रूरी है। यह ‘राक्षस प्रवृत्ति’ क्या है?
वेद प्रकाश गुप्ता: राक्षस प्रवृत्ति—दिखावा रूप नहीं, बल्कि व्यवहार है।
जो व्यक्ति…
नारी का अनादर करे, माता-पिता को अपमानित करे, कमजोर पर अत्याचार करे, जाति और नफरत फैलाए
और हिंसा को हथियार बनाए
वह आधुनिक राक्षस ही है।
ऐसे लोगों को रोकने के लिए ज़रूरी है कि समाज के युवा साहसी, अनुशासित और चरित्रवान बनें।
इसीलिए हम ‘शक्ति-संस्कार शिविर’, नशा मुक्त अभियान, और चरित्र निर्माण कार्यशालाएं चला रहे हैं।
प्रश्न 6: श्री देवालय संघ का अंतिम लक्ष्य क्या है?
वेद प्रकाश गुप्ता: हमारा लक्ष्य बहुत सरल है—
“एक ऐसा भारत जहाँ माता-पिता का सम्मान, बहन-बेटी की सुरक्षा, पति-पत्नी का विश्वास, और समाज में समानता—चारों आधार स्तंभ बनें।”
हम चाहते हैं कि हर युवक-युवती यह शपथ ले—
“मैं किसी का अपमान नहीं करूंगा, किसी को डराऊंगा नहीं,
माता-पिता का मान रखूंगा, हर बहन-बेटी का भाई बनूंगा,
जाति के नाम पर भेदभाव नहीं करूंगा।”
प्रश्न 7: युवा पीढ़ी को आप क्या संदेश देना चाहेंगे?
वेद प्रकाश गुप्ता:
अपने घर को सबसे पहले प्राथमिकता दें।
माता-पिता से बड़ा गुरु कोई नहीं।
नारी सम्मान से बढ़कर कोई धर्म नहीं।
और समाज की रक्षा के लिए खुद को मजबूत बनाना जरूरी है—शारीरिक भी, मानसिक भी, और चरित्र से भी।
जो युवा अपने घर, अपनी बहनों, और अपने समाज की रक्षा करता है—
वही असली वीर है।



